अंबाला सिटी। निराकार का अर्थ कदापि ये नहीं है कि भगवान का कोई आकार नहीं है। निराकार का अर्थ है, भगवान का कोई आकार निश्चित नहीं है। केवल धनुष धारी ही भगवान हैं क्या, या केवल बंसी धारी ही भगवान हैं, ऐसा नहीं है, प्रभु का कोई निश्चित रूप नहीं है। प्रभु कहते हैं, मैं न तो अपना रूप बनाने के लिए स्वतंत्र हूं और न ही अपना नाम रखने के लिए, भक्त ही मेरा जैसा चाहे रूप बना देता है, मैं उसी में जाकर बैठ जाता हूं। वह जो नाम लेकर पुकारता है उसे सुनकर चला आता हूं। मैं हमेशा भक्त के बस में ही रहता हूं। यह सद्विचार सिटी के नावल्टी रोड स्थित श्री रघुनाथ मंदिर भवन में चल रही संगीतमयी दिव्य श्रीराम कथा में महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरि महाराज की अध्यक्षता में पंडित सुभाष शास्त्री सहारनपुर ने कहे।
संगीतमय श्रीराम कथा में भजनों की धुनों पर भक्त मंत्रमुग्ध होकर झूमते रहे। महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरि महाराज ने कहा कि प्रभु जब अपने गुणों को प्रकट कर देते हैं तो सगुण हो जाते हैं और गुणों को समेट लेते हैं तो निर्गुण हो जाते हैं। निर्गुण और निराकार का अर्थ यह नहीं है कि भगवान का कोई गुण नहीं या भगवान का कोई आकार नहीं है। महाराज ने कहा, जिनको हम राक्षस कहते हैं, वह पूर्व जन्म में हमारे जैसे ही इंसान थे। उनके कर्म समाज विरोधी, अपमान जन्य हो गए इसलिए अगले जन्म में उनको राक्षस बनना पड़ा। इस मौके पर श्री रघुनाथ मंदिर प्रबंधक कमेटी के अधिकारियों ने बताया कि 13 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के लिए शहर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ भक्त पहुंच रहे हैं।
भक्तों के रहने व खाने आदि का प्रबंध श्री कल्याण कमल सत्संग समिति शहर की तरफ से किया जाएगा। कथा में रमन जैन मुक्तसर, जितेंद्र गोयल, कुलभूषण गोयल, शीतल बंसल, अरुण गर्ग, कृष्ण शर्मा, बृजलाल सिंगला, नरेंद्र गोयल, सतपाल बंसल आदि भक्तों ने परम आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम सियापति रामचंद्र जी की आरती कर विशेष आशीर्वाद प्राप्त किया।