अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (असीमा) के महासचिव गौरव सोनी बताते हैं कि अक्टूबर से इस नियम के दायरे में एक करोड़ से कम की टर्नओवर वाले कारोबारी आए हैं। अब एक जनवरी से सभी सूक्ष्म इकाइयाें को भी आईएसआई ग्रेडिंग के साथ ही साइंस उत्पादों की बिक्री करनी होगी। अब कारोबारियों के पास करोड़ों रुपये का माल स्टॉक में है, उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि माल को कहां बेचें। उनकी पूर्व में मंत्रालय में आईएसआई ग्रेडिंग को देख रहे अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी, मगर इसमें भी कोई सार्थक समाधान नहीं निकल पा रहा है।
कारोबारियों ने बताया कि नई अधिसूचना के अनुसार सबसे पहले तो कागजी कार्यवाही पूरी रखनी होगी। मसलन कहां से माल आया, कहां गया, कहां बनाया, कितना टूटा, कितने नमूने पास हुए कितने नमूने फेल हुए आदि जानकारियों का रिकॉर्ड रखना होगा। जिन कारोबारियों का बिजनेस एक करोड़ रुपये से ऊपर का है उन्होंने अपने बड़े बड़े प्लांटों में ग्लासवेयर उत्पादों की जांच के लिए लैब भी स्थापित कर ली हैं, मगर जो छोटे कारोबारी हैं उन्हें कोलकाता स्थित सरकारी लैबोरेटरी में जांच के लिए उत्पादों के मेटेरियल को भेजना होगा।
अब हर लॉट की जांच होगी या दो चार की जांच होगी अभी कारोबारियों को यह तक साफ नहीं है। वहीं प्रदेश सरकार के गठन के बाद ही कारोबारी एक बार फिर से कोशिश करेंगे अपनी मांग सरकार तक मजबूती से रख सकें। हैरानी की बात तो यह है कि अब बाजार में मांग भी काफी कम रह गई है, क्योंकि सभी इंतजार कर रहे हैं कि नया आईएसआई ग्रेड का माल ही खरीदें। कारोबारी बताते हैं कि वह अभी करीब 70 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से कांच चीन से खरीद रहे हैं , अब इसे कबाड़ में भी बेचें तो 70 पैसे प्रति किलोग्राम के रेट मिलेेंगे। ऐसे में इस रेट में उनको काफी नुकसान होगा।