अंबाला। श्री शत चंडी महायज्ञ और देवी भागवत महापुराण कथा में गढ़वाली ढोल और दमाऊ भी आए हुए हैं। श्रीशत चंडी महायज्ञ के शुभारंभ पर निकाली गई शोभायात्रा और कलश यात्रा में गढ़वाली ढोल मास्टर मोहन लाल और दमाऊ मास्टर आगे आगे ढोल बजाते हुए चल रहे थे।
उत्तराखंड के मोखतला जिला चमौली निवासी मोहन लाल ने बताया कि वह इस महायज्ञ में नौ दिन के लिए आए हैं। जैसे-जैसे कार्यक्रम होता है वैसे वैसे वह ढोल और दमाऊ बजाते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें 56 साल हो गए हैं गढ़वाली तांबे का ढोल बजाते हुए, इस ढोल की बात ही निराली है। इस ढोल में लकड़ी की जगह तांबा हैं और दोनों तरफ चमड़ा लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि जब वह ढोल बजाते हैं आसपास का माहौल भक्तिमय हो जाता है।