अंबाला छावनी में हाथीखाना मंदिर के पास बनाया गया डंपिंग जोन। संवाद
अंबाला। छावनी में नगर परिषद ने जगह के अभाव में रिहायशी इलाके में कचरे का डंपिंग जोन बना दिया है। बारह क्रॉस रोड पर बना यह डंपिंग जोन अब स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। यहां धड़ल्ले से पर्यावरण के नियम टूट रहे हैं।
यहां पर खुले आसमान के नीचे कचरा गिराया जा रहा है, जिससे बारिश का पानी कचरे से होता हुआ भूतल को दूषित कर रहा है। इसके साथ ही कचरे के कारण घरों में मक्खियाें की भरमार रहती है, जिससे स्थानीय लोगों की मुसीबत बढ़ गई है। उन्हें अब अपने स्वास्थ्य की चिंता सता रही है।
इस डंपिंग प्वाइंट पर पूरी छावनी का कचरा रोजाना ट्रैक्टर ट्रालियाें की मदद से गिर रहा है। नगर परिषद के आंकड़ों की मानें तो रोजाना 110 टन कचरा यहां पर गिराया जा रहा है। मगर कचरे के इस डंपिंग जोन का संचालन सॉलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए किया जा रहा है। आबादी के करीब होने के कारण यह डंपिंग जोन अब स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। डंपिंग जोन एक्ट के ये नियम तोड़ रहा : डंपिंग जोन को आबादी वाले क्षेत्रों व पानी के स्रोतों से दूर स्थापित किया जाना चाहिए, जबकि यहां पर पानी का ट्यूबवेल नजदीक ही लगा है, जिससे आसपास की एक दर्जन कॉलोनियों में पानी सप्लाई होती है, इसके साथ ही यहां कचरे से निकलने वाला तरल पदार्थ भूजल में प्रवेश न करे इसका प्रबंध भी नहीं किया गया है।
हवा में फैल रही दुर्गंध, स्थानीय लोग परेशान : सॉलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट के अनुसार डंपिंग प्वाइंट पर कचरे को ठीक से प्रबंधित किया जाना चाहिए ताकि यह हवा में न फैले, जानवरों को आकर्षित न करे एवं दुर्गंध न फैलाए। जबकि हालात यह हैं कि यहां पर दिनभर पशु विचरण करते दिखाई दे रहे हैं।
कचरे की दुर्गंध को काफी दूर तक महसूस किया जा रहा है। दिनभर कचरा उठाने वाले वाहनों के गुजरने से कचरा सड़क पर भी बिखरा रहता है।