अंबाला। भारत पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में किसी अनहोनी से निपटने को मॉक डि्रल की तैयारी चल रही है। वर्ष 1971 में भी भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव हुआ था। उस दौरान के हालातों से सबक लेते हुए पूर्व सैनिक बताते हैं कि जब भी सायरन बजे तो समझो खतरा है।
दुश्मन के जहाज क्षेत्र में तो रुकरुक बजेंगे सायरन
भूतपूर्व सैनिक वेलफेयर कमेटी के महासचिव खुशबीर सिंह दत्त ने कहा कि रुक-रुककर सायरन बजे तो समझो दुश्मन का जहाज आपके क्षेत्र में है। हमने 1971 का युद्ध देखा है, बंकर खोदे गए थे। ब्लैक आउट का मतलब बिल्कुल अधेरा, ट्रैफिक भी रुक जानी चाहिए। इसके अलावा रुक-रुककर सायरन बजे तो समझो खतरा है। इस दौरान लोगों को तुरंत दीवार के साथ चिपक कर खडे़ हो जाना चाहिए।
मॉकडि्रल जैसा कौशल आपकी करेगा रक्षा
भूतपूर्व सैनिक वेलफेयर कमेटी के प्रधान सूबेदार गुलाबदीन का कहना है कि युद्ध जैसे हालात बनने पर आम नागरिकों को हमारी सेना का सहयोग करना चाहिए। झूठी अफवाहों से बचें, धार्मिक उन्माद फैलाने वाले लोगों से बचें। मॉक डि्रल को अच्छे से समझें क्योंकि यह कौशल आपके व आपके परिवार की रक्षा करेगा।
घरों में किसी प्रकार से न जलाएं लाइट
भूतपूर्व सैनिक वेलफेयर कमेटी के कोषाध्यक्ष हरिंदर दत्त शर्मा बताते हैं कि सायरन बजते ही सबसे पहले दरवाजे खिड़की बंद कर लें। घर और वाहन की लाइटों को बंद कर दें। इसके बाद खुद व अपने आप को सुरक्षित स्थान पर ले जाएं।
रेडियो या आधिकारिक सूचना पर ही करें भरोसा
भूतपूर्व सैनिक वेलफेयर कमेटी के सलाहकार सूबेदार निर्मल सिंह रंधावा ने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया पर काफी अफवाहें फैलती हैं। युद्ध जैसी परिस्थिति हो तो सरकारी रेडियो या सरकारी सूचना तंत्र पर सूचना लेने का काम करें। घबराएं नहीं अपने आप को जितना शांत रखेंगे उतना ही आप सुरक्षित रख सकेंगे।
खुशबीर सिंह दत्त, महासचिव भूतपूर्व सैनिक वेलफेयर कमेटी अंबाला।- फोटो : kathua
खुशबीर सिंह दत्त, महासचिव भूतपूर्व सैनिक वेलफेयर कमेटी अंबाला।- फोटो : kathua