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Ambala News: फूल और हाथ की टक्कर, हाथी चल रहा मस्त चाल

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वैभव शर्मा
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अंबाला। अंबाला में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। दोनों ही पार्टियों ने अपने अपने प्रत्याशियों के लिए जोर लगा दिया है। मगर वर्ष 2019 की चुनौतियों से भी अलग इस बार की चुनौतियां प्रत्याशियों के सामने खड़ी हैं।
दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी का हाथी अपनी चाल चलता दिखाई दे रहा है। कांटे की टक्कर के बीच जब एक-एक वोट के लिए लड़ाई हो रही है तो ऐसे में बसपा का यह हाथी कहीं समीकरण न बिगाड़ दे यह भाजपा और कांग्रेस के लिए भी चिंता का सबब बना है।
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ऐसा इसलिए भी, क्योंकि वैसे तो बीते दो लोकसभा चुनावों में मोदी लहर के कारण बसपा अपना कमाल न दिखाई हो मगर उनका लोकसभा क्षेत्र में अपना एक अलग वोट बैंक है जो उन्हें अधिकांश चुनावों में मिलता रहा है। इस बार जब कांटे की टक्कर है तो बसपा को पड़ने वाला वोट भाजपा और कांग्रेस के खेल को बिगाड़ सकती हैं।

भाजपा से नहीं संभल रहे किसान तो कांग्रेस भी सतर्क

भाजपा प्रत्याशी बंतो कटारिया को जहां अंबाला शहर और नारायणगढ़ क्षेत्र के कुछ गांवों में किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, कांग्रेस के वरुण चौधरी के लिए भी राह आसान नहीं है। हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी की रैली का कितना असर ईवीएम में दिखेगा इसको लेकर चिंता के बादल गहरा रहे हैं। आलम यह है कि अंबाला की चार के चार विधानसभा में कोई भी विधानसभा ऐसी नहीं है जिसमें प्रत्याशी यह दावा ठोक सके कि इस विधानसभा से तो हमारी पार्टी प्रमुख रहेगी। हालांकि यह बात अलग है आप किसी पार्टी के प्रत्याशी से बात करेंगे तो वह एक बड़ी मुस्कान के साथ खुद को विजेता बताते दिखेंगे। वहीं बसपा ने पंचकूला के रहने वाले पवन रंधावा को चुनावी मैदान में इस बार उतारकर दाव खेला है।
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बसपा का तय वोट बैंक, छुड़ा सकता है विरोधियों के पसीने

शहर के सेक्टर 7 निवासी चुनाव विश्लेषक हेमंत शर्मा बताते हैं कि बसपा की बात की जाए, तो पांच वर्ष पूर्व मई, 2019 लोकसभा आम चुनाव में बसपा के उम्मीदवार नरेश कुमार को 7.3 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे। बेशक उनकी जमानत राशी जब्त हो गयी थी, मगर 1 लाख के करीब वोट प्राप्त करना बड़ी बात थी। उससे पहले वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव में बसपा के उम्मीदवार डॉ. कपूर सिंह ( वर्तमान में कांग्रेस में) को 8.4 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे। इसी प्रकार वर्ष 2009 लोकसभा आम चुनाव में बसपा के उम्मीदवार चंद्रपाल को 21.7 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे। रोचक बात यह ही कि उस चुनाव में विजयी रही कांग्रेस की कुमारी सैलजा और भाजपा के रतन लाल कटारिया के अतिरिक्त बसपा के चंद्रपाल की भी उस चुनाव में जमानत बचा गई थी। उससे पूर्व वर्ष 2004 लोकसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर अंबाला लोस सीट से चुनाव लड़ते हुए चंद्रपाल हालांकि केवल 6.7 प्रतिशत बनती थी। जबकि इससे पहले वर्ष 1999 में बसपा उम्मीदवार को 12 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। ऐसे में यह आंकड़े बताते हैं कि इस कांटे की टक्कर में बसपा का अपना निश्चित वोट बैंक किसी भी प्रमुख पार्टी के प्रत्याशियों का हलक सुखा सकता है।
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