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Ambala News: खरीद व्यवस्था के खिलाफ भड़के किसान, केंद्र और प्रदेश सरकार का फूंका पुतला

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मोहडा ​स्थित नई अनाज मंडी में मुख्यमंत्री के पुतले की शवयात्रा निकालते भारतीय किसान यूनियन शहीद
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प्रति एकड़ 26 क्विंटल खरीद सीमा तय करने, सत्यापन में देरी व पराली का उठान न होने पर जताई नाराजगी
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। सरकारी नीतियों और खरीद व्यवस्था के खिलाफ किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। धान के सत्यापन में देरी, पराली का उठान न होने और प्रति एकड़ 26 क्विंटल खरीद की सीमा तय किए जाने से आक्रोशित किसानों ने रविवार को हरियाणा किसान-मजदूर मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह) के आह्वान पर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार का पुतला फूंका।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। रविवार दोपहर को भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के सदस्य मोहड़ा स्थित नई अनाज मंडी के गेट पर एकत्रित हुए। इसके बाद सभी किसानों ने प्रदेश सरकार की शवयात्रा निकाली गई और नारेबाजी करते हुए मार्केट सचिव कार्यालय के गेट के अंदर पहुंचे। जहां पर मंजीत ने किसानों को संबोधित किया। इसके बाद पुतले को आग के हवाले कर रोष प्रकट किया गया।
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प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह) के प्रवक्ता मंजीत सिंह ने बताया कि सरकार एक तरफ राज्य में किसानों के खुशहाल होने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मंडियों में किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों ने दो-तीन महीने पहले ही मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण कराया था। अब जब फसल कटकर मंडियों में पहुंच रही है, तो पोर्टल पर सत्यापन नहीं हो पा रहा है। इससे गेट पास नहीं कट रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीद की सीमा को पहले के 30-33 क्विंटल प्रति एकड़ से घटाकर 24 क्विंटल प्रति एकड़ कर दिया गया है, जो किसानों के साथ अन्याय है।ब
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बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी
किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द पोर्टल सत्यापन की कमियों को दूर नहीं किया और 24 क्विंटल की कैपिंग नहीं हटाई, तो किसान बड़ा आंदोलन करने को विवश होंगे। उन्होंने कहा कि किसान अपनी खुशी से सड़कों पर नहीं उतरते, बल्कि सरकार की नीतियां ही उन्हें सड़क जाम करने जैसे कदम उठाने पर मजबूर करती हैं। यूनियन के मोहड़ा जोन प्रभारी बलजीत सिंह ने बताया कि किसान-मजदूर मोर्चा में करीब 10 से 15 किसान संगठन शामिल हैं। सभी संगठनों ने निर्णय लिया है कि जब तक धान खरीद पर लगी सीमा (कैपिंग) को हटाया नहीं जाता और पोर्टल का सत्यापन तुरंत पूरा नहीं किया जाता, किसानों का विरोध जारी रहेगा।
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