हमारी धान की फसल करीब आधी खराब हो गई थी। फसल खराब होने के बारे में हमने मुआवजे की मांग की थी। इससे कि नुकसान की भरपाई की जा सके। परंतु यहां तो उलटा प्रीमियम ही किसानों के खातों में डाल दिया जा रहा है।
- त्रिलोचन शर्मा, किसान।
सरकार और कंपनी की ओर से हम किसानों के साथ इस तरह का मजाक किया जा रहा है। कंपनी मुआवजा देने की बजाय जो धान की फसल के समय प्रीमियम काटा गया था। उसे ही वापस करते हुए मुआवजा देने से पल्ला झाड़ रही है। जो कि पूरी तरह से गलत है।
- जसपाल सिंह, किसान।
प्रीमियम के समय तो कोई भी नहीं पूछता है। परंतु अब जब मुआवजा देने की बात आई तो प्रीमियम की रकम ही वापस कर रहे हैं। इससे कि मुआवजा देना ही नहीं पड़े और यह कह सके कि कंपनी ने प्रीमियम ही नहीं लिया है। हम इस संबंध में उपायुक्त को शिकायत सौंपेंगे।
-मेवा सिंह, किसान।
पिछले कई सालों से कंपनी द्वारा प्रीमियम काटा जा रहा है। जब किसानों ने मुआवजे की मांग नहीं की, तब तो कंपनी ने प्रीमियम की रकम वापस नहीं की। अब जब कंपनी को मुआवजे देने के बारे में कहा जा रहा है तो उन्होंने प्रीमियम ही वापस लौटा दिया। इस संबंध में अधिकारियों से जवाब मांगेंगे।
- गुरविंद्र सिंह, किसान।
इस संबंध मेरे संज्ञान में मामला आया है, इस संबंध में कंपनी से पूछा जाएगा कि आखिर यह क्या हुआ है। परंतु इसका फिजी नामक बीमारी से कोई भी लेना-देना नहीं है। अभी तो इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकता हूं।
- गिरीश नागपाल, जिला कृषि एवं किसान कल्याण विभाग अधिकारी।