लघु सचिवालय परिसर में धरने पर बैठे किसान।
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नारायणगढ़। गन्ने की बकाया पेमेंट को लेकर किसानों का लघु सचिवालय में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। लघु सचिवालय में इकट्ठे हुए गन्ना उत्पादकों की 21 सदसीय किसान समिति के सदस्यों सहित अन्य किसानों ने भी प्रशासन सरकार व मिल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। किसान नेताओं का कहना था कि जब तक गन्ने की पेमेंट को लेकर उनकी मांगें पूरी नहीं होती तब तक उनका अनिश्चितकालीन धरना ऐसे ही जारी रहेगा।
आज भी धरनारत किसानों के लिए क्षेत्र के एतिहासिक गुरुद्वारा श्री टोका साहिब से ही लंगर भेजा गया। इस अवसर पर 21 सदस्यीय किसान समिति के सदस्य विक्रम राणा ने बताया कि वर्तमान पेराई सत्र में गन्ना उत्पादकों द्वारा बेचे गए गन्ने की पेमेंट का बहुत ही बुरा हाल है। उन्होंने कहा कि गत सात फरवरी को चीनी मिल बणौंदी के समक्ष हुई किसानों की पंचायत में पहुंचे एसडीएम नारायणगढ़ ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए थे।
विक्रम राणा ने बताया कि क्षेत्र के गन्ना उत्पादकों द्वारा गठित 21 सदसीय किसान समिति ही गन्ना उत्पादकों की समस्याओं को लेकर धरना प्रदर्शन कर रही है। अब भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरजीत सिंह ने भी उनकी मांगों का समर्थन करते हुए उन्हें पूर्ण रूप से अपना समर्थन देने की घोषणा की है।
समिति के एक अन्य सदस्य धनराज लखनौरा ने बताया कि वैसे तो केंद्रीय सरकार व प्रधानमंत्री किसानों की आय दोगुना करने का वायदा कर रहे हैं परंतु इस चीनी मिल द्वारा जिस प्रकार किसानों को गन्ने की पेमेंट की जा रही है उससे तो यही प्रतीत हो रहा है कि किसानों की आय दोगुनी होने के स्थान पर शून्य लाने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन को उनकी बात सुननी चाहिए। धनराज ने तो यहां तक कहा कि यदि प्रशासन उनकी इन मांगों का कोई समाधान नहीं किया तो लघु सचिवालय के समक्ष उनका अनिश्चितकालीन धरना दिल्ली की तर्ज पर जारी रहेगा।
किसान समिति के सदस्य गुरुदेव सिंह बख्तुआ ने बताया कि नारायणगढ़ चीनी मिल बणौंदी का वर्तमान पेराई सत्र 24 नवंबर से आरंभ हुआ था और उस समय मिल प्रबंधन ने प्रशासन की उपस्थिति में यह वायदा किया था कि किसानों को उनके गन्ने की पेमेंट शेड्यूल के अनुसार गन्ना डालने के 14 दिन बाद कर दी जाएगी। गुरुदेव सिंह के अनुसार चीनी मिल प्रबंधन अब अपने किए गए वादे से पूरी तरह मुकर चुके हैं और अब तक महज 9 दिसंबर तक की गन्ने की पेमेंट किसानों को की गई है।
किसान नेता के अनुसार प्रदेश सरकार द्वारा गेहूं व धान की पेमेंट किसानों के खाते में सीधे रूप से डाल देने के उपरांत अब उनके आढ़तियों से मदद लेने के रास्ते भी पूरी तरह से बंद हो चुके हैं और गन्ने की पेमेंट समय पर न मिलने से मजदूरों को गन्ने की छिलाई के पैसे देने के साथ-साथ स्कूल में पढ़ने वाले उनके बच्चों की फीस देने के लाले भी पढ़ गए हैं। उन्होंने प्रशासन से प्रार्थना की कि वे इस चीनी मिल से जुड़े गन्ना उत्पादकों की पेमेंट की समस्या का तुरंत समाधान करे। जिससे क्षेत्र का किसान खुशहाल हो।