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सरकार नहीं मान रही किसानों की बातें, अंबाला-हिसार हाईवे पर कट रहीं अन्नदाताओं की रातें

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farmer protest - फोटो : Ambala
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अंबाला सिटी। अंबाला-हिसार हाईवे पर तीसरे दिन भी धरती पुत्रों का प्रदर्शन जारी रहा। इस तरह करीब 66 घंटे से यह रोड जाम है। खेत से सड़क पर आकर बैठे किसान भूख-प्यास से बेचैन हैं पर उन्हें अपनी फसल खरीद की चिंता खाए जा रही है। इसीलिए कोरोना के डर और गुलाबी ठंड की परवाह किए बिना अन्नदाता की तीसरी रात भी सड़क पर ही बीती।
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उधर किसान सड़क पर आया तो शहरवासियों के भी पसीने छूटने लगे हैं। क्योंकि उन्हें हिसार हाईवे पर जाने के लिए अब वैकल्पिक रास्तों का प्रयोग करना पड़ रहा है। हालांकि शुक्रवार को अच्छी बात यह रही कि पहली बार प्रशासन की ओर से किसानों को मनाने का कोई प्रयास किया गया और तहसीलदार ने बातचीत के लिए कदम बढ़ाए। लेकिन बातचीत सिरे नहीं चढ़ पाई। शुक्रवार को भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने भी किसानों का हौसला बढ़ाया और उनके साथ धरने पर भी बैठे।
क्या हैं मांगें, क्यों किसान खत्म नहीं कर रहे प्रदर्शन
किसानों की सिर्फ एक ही बड़ी बात है। इसमें मुख्य रूप से मोबाइल पर भेजे जाने वाले मैसेज न आने और नमी की मात्रा बढ़ाने के लिए कहा जा रहा है। किसानों की मांग है कि पुराने सिस्टम से ही धान की खरीद हो। किसान अपनी फसल काटे और सीधे मंडी में लेकर आए। उन्होंने कहा कि सरकार एक दिन पहले मैसेज भेजती है यदि उस दिन हमारे पास फसल लाने का विकल्प न हो तो क्या करें? फसल कटी न हो तो क्या करें? उन्होंने कहा कि जब फसल कटेगी तभी मंडी में आएगी। दूसरी तरफ किसानों का भय यह भी है कि कहीं उनका धरना समाप्त कर जिला प्रशासन फिर से खरीद बंद न करवा दे। अब तक जिले में शुक्रवार तक 35 हजार 328 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी थी। इसमें से 1278 मीट्रिक टन धान की लिफ्टिंग भी हो चुकी है।
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जानबूझ कर किसानों को परेशान कर रही सरकार : गुरनाम सिंह
सरकार जानबूझ कर किसानों को परेशान करने पर तुली हुई है। सरकार वे वजह के नियम लाकर किसानों को तंग कर रही है। जिससे किसान इन नियमों से तंग होकर खेती से किनारा करें और सरकार को कम से कम फसल खरीदनी पड़े और किसान मजबूरी में प्राइवेट ठेकेदारों को अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर हो जाए। वहीं फसल की खरीद न होने से किसान अगली फसल नहीं लगा पा रहे हैं। जिस कारण आने वाले समय में आलू व अन्य फसलों की कमी भी हो सकती है और गेहूं की लगाई में भी देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही सरकार इस पर कोई फैसला नहीं लेती है तो कोई कड़ा निर्णय लिया जा सकता है। वहीं गृह मंत्री अनिल विज पर तंज करते हुए उन्हें अकल का अंधा भी बता दिया।
धरने प्रदर्शन के बीच रिकार्ड खरीद
बेशक हिसार हाईवे तीसरे दिन भी बंद रहा लेकिन शहर की अनाज मंडी में जिलेभर में सबसे ज्यादा खरीद हुई। अंबाला शहर मंडी में 6 हजार मीट्रिक टन यानि 60 हजार क्विंटल धान की खरीद हुई। इतनी ही खरीद नारायणगढ़ मंडी में भी हुई। इसके अलावा छावनी मंडी में 735, बराड़ा में 998, भरेड़ी कलां में 1000, कड़ासन मंडी में 635, केसरी में 565, मुलाना में 1326, साहा में 1296, सरदेहड़ी में 100, शहजादपुर में 1710 व तलहेड़ी मंडी में 594 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई। शुक्रवार को 20 हजार 915 मीट्रिक टन धान जिले की अनाज मंडियों में खरीदा गया।
दो अनाज मंडियों में नहीं हुई खरीद
नन्यौला अनाज मंडी के अलावा उगाला मंडी में शुक्रवार को खरीद नहीं हुई। इन दोनों अनाज मंडियों में केवल सरकारी खरीद के पहले दिन खरीद हुई थी। उगाला में 371 और नन्यौला में 300 मीट्रिक टन धान की खरीद पहले दिन हुई थी।
ट्रांसपोर्ट्स के पास वाहन कम पड़े तो ट्रैक्टर-ट्रॉली कर सकते हैं प्रयोग: पीकेदास
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश भर के उपायुक्तों, ट्रांसपोर्ट्स, संबंधित खरीद एजेंसियों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। उन्होंने कहा कि धान की खरीद व उठान समय अवधि के तहत ही होने चाहिए। आढ़ती व किसानों को किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करने दिया जाएगा। यदि वाहन कम पड़ते हैं तो ट्रांसपोर्ट्स ट्रैक्टर-ट्रालियों का भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा मिलर्स व आढ़तियों के भी वाहनों को धान उठान के लिए प्रयोग किया जा सकता है। यदि फिर भी धान को मंडी से मिल तक पहुंचाने में वाहनों संबंधी कोई समस्या आती है तो जिला प्रशासन रिक्यूजेशन करके वाहन उपलब्ध करवा सकता है।
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