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10वीं की टॉपर रही छात्रा की पहल : मंदिर में पूजा करने के बाद प्रसाद के स्थान पर बांट रही मास्क, साबुन और हैंड सैनिटाइजर

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अंबाला। कभी आपने सुना है कि जो व्यक्ति मंदिर में पूजा-अर्चना कर लौटे उसके हाथ में प्रसाद की थैली न हो। शायद सुना भी होगा तो बहुत कम। लेकिन साईं बाबा मंदिर कॉलोनी जलबेहड़ा रोड निवासी 12वीं कक्षा की प्रिया अपने जुड़वा बॉबी भाई के साथ मिलकर कुछ अलग कर रही है। जी हां वह कोरोना काल में मंदिर में पूजा अर्चना करने जाती है। लेकिन उसके हाथ में प्रसाद की जगह बांटने के लिए मास्क, साबुन और हैंड सैनिटाइजर होते हैं। जो लोगों को प्रसाद के रूप में देकर उन्हें कोराना से बचने के लिए जागरूक भी करती हैं।
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मुसीबत की घड़ी है सबका साथ चाहिए। सैनिटाइजर मैं लेकर आई हूं हाथ आपका चाहिए। अंबाला शहर की साईं बाबा मंदिर कालोनी जलबेहड़ा रोड निवासी 12वीं कक्षा की प्रिया लॉकडाउन से लेकर अब तक कुछ ऐसा ही संदेश दे रही है। वह मंदिर में जाती हैं लेकिन प्रसाद वितरित नहीं करती बल्कि प्रसाद के तौर पर इन दिनों सैनिटाइजर वितरित कर रही हैं। भगवान में आस्था रखने वाली प्रिया का बखूबी साथ दे रहा है उसका जुड़वा भाई बॉबी। दरअसल लॉक डाउन के दौरान आनलाइन कक्षाएं चलती थी। प्रिया शहर के तुलसी पब्लिक स्कूल की छात्रा है। लॉकडाउन के दौरान स्कूल में ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान खुद को सुरक्षित रखने के साथ-साथ दूसरों को भी कोरोना से सुरक्षित रखने में हम किस तरह भूमिका निभा सकते हैं यह बताया जा रहा था। इसी से प्रिया के मन में यह नेक काम करने का विचार आया।
जुड़वां होने के साथ-साथ रुचि भी दोनों की एक जैसी
प्रिया और बॉबी दोनों बहन-भाई जुड़वां होने के साथ-साथ उनकी रुचि भी मिलती-जुलती है। दोनों ही तुलसी पब्लिक स्कूल में 12वीं कक्षा में हैं। 10वीं में प्रिया अपने स्कूल में टॉपर रही थी। इस समय प्रिया नॉन मेडिकल की पढ़ाई कर रही है जबकि बॉबी आर्ट्स में है। प्रिया के साथ बॉबी भी हर मंगलवार और वीरवार को मंदिर जाता है। मंगलवार को हनुमान मंदिर और वीरवार को साथ ही लगते पीर बाबा पर जाकर दोनों मत्था टेकते हैं और इसके बाद वह प्रसाद के रूप में जो जरूरतमंद मिलता है उनको सैनिटाइजर, मास्क और साबुन देते हैं। दोनों बहन-भाई का मनाना है कि प्रसाद तो खुद की भलाई के लिए हम वितरित करते हैं लेकिन सैनिटाइजर, मास्क और साबुन जैसे जरूरी वस्तुएं एक व्यक्ति को देकर कई व्यक्तियों को सुरक्षित कर सकते हैं। उसका इस कार्य में उसके पिता अशोक गुलाटी व मां रेनू गुलाटी भरपूर सहयोग कर रहे हैं और उन्हीं की प्रेरणा से दोनों बहन-भाई ऐसा कर पा रहे हैं।
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