अंबाला सिटी। आर्य समाज रेलवे रोड द्वारा केपीएके महाविद्यालय में स्वामी दयानंद सरस्वती के जन्मोत्सव और बोधोत्सव को श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाया गया। इसमें यज्ञ, प्रवचन व भक्ति पूर्ण भजन और बच्चों द्वारा प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीएवी कॉलेज प्रबंधक समिति नई दिल्ली के उप प्रधान रिटायर्ड जस्टिस प्रीतम पाल ने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हर मनुष्य को जीवन में दो मूल्यों को अपनाना चाहिए। उसे चरित्रवान बनना चाहिए और अपनी नेक कमाई का कुछ हिस्सा दान-पुण्य में लगाना चाहिए।
उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि स्वामी कभी असत्य नहीं बोलते थे। वे हमेशा वेदों के प्रचारक रहे। उन्होंने बताया कि वेद में लिखी बातों को कोई चुनौती नहीं दे सकता। उन्होंने आह्वान किया कि मनुष्य को हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए, क्योंकि वह जैसे कर्म करेगा, उसे वैसा ही फल मिलेगा। चंडीगढ़ से आए मुख्य वक्ता आचार्य हर्षवर्धन ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती को जानने के लिए उनके गुरु स्वामी विरजानंद को जानना बहुत आवश्यक है।
उन्होंने स्वामी विरजानंद के जीवन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की और उनके जीवन की कुछ घटनाओं का वर्णन किया। डॉ. विकास कोहली ने बताया कि महर्षि दयानंद का व्यक्तित्व सबसे अलग था। उनके भीतर सभी सद्गुणों का मिश्रण था। इस अवसर पर विभिन्न आर्य समाजों व स्कूल, कॉलेजो से लगभग 300 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में वेद प्रकाश वेदालंकार, प्राचार्य सलिल दोसांज, प्राचार्य आरआर सूरी, प्राचार्य सुनीता कपूर सहित अन्य मौजूद रहे।