मेरा जॉर्डन दूसरे डॉग से बिल्कुल अलग है। साढ़े तीन साल का जॉर्डन घर के दुख सुख में भी उनका साथी है। मजाक में भी कोई घर में लड़ाई करने लगता है तो बीच में आ जाता है। हाथ व टांग पकड़ रोकने लग जाता है। जब तक हटते नहीं है तो रूकता नहीं है। एक-दूसरे को छोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं बचता। अगर कोई खुशी का मौका हो तो पता नहीं कैसे पता चल जाता है और घर में इधर-उधर घूमता रहता है। कोई मेहमान आते हैं तो ओर भी ज्यादा खेलने लग जाता है। घर से कहीं चले भी जाते हैं तो जॉर्डन के होते हुए कोई घर में दाखिल नहीं हो सकता। जॉर्डन का यहीं व्यवहार उसके हमारे परिवार का सदस्य बनाता है। कभी भी वो बीमार हो जाता है तो घर का हर सदस्य उदास सा हो जाता है। जब तक सुबह-सुबह जॉर्डन के साथ न खेल लें तो मन नहीं लगता।
छोड़कर जाने का मन ही नहीं करता
जब भी कहीं रिश्तेदारी में जाना पड़ जाता है तो जॉर्डन को अकेले छोड़ने का मन नहीं करता। प्राथमिकता यह रहती है कि कोई न कोई घर में जरूर रहे ताकि जॉर्डन को परेशानी न हो। सुबह व शाम बिना सैर के नहीं रहता है। दूर से देख ले तो घुमाने की जिद करता है।
प्रस्तुति: मनोज कुमार