अंबाला। आज से आठ वर्ष पूर्व नवंबर 2016 में अंबाला कैंट को प्रशासनिक उपमंडल का दर्जा प्रदान किया गया था। यह दर्जा ऊर्जा, परिवहन और श्रम मंत्री अनिल विज के प्रयास से मिला था। मगर आठ वर्ष बीतने के बावजूद अभी तक अंबाला कैंट को न्यायिक अदालतें नहीं मिल सकी हैं।
यहां पर अधिवक्ताओं का अपना बार एसोसिएशन है और एक अलग से स्थान पर नोटरी आदि का कार्य करने वाले अधिवक्ता भी बैठते हैं। इसके लिए लंबे समय से मांग भी रही है। वहीं लोगों को भी वाद विवाद के लिए शहर जाने को मजबूर होना पड़ता है। अधिवक्ता हेमंत कुमार का कहना है कि कैंट उपमंडल में भी जिले की नारायणगढ़ सब डिवीजन की तर्ज पर शीघ्र अधीनस्थ ज्यूडिशियल कोर्ट्स (न्यायिक अदालतें ) अर्थात सिविल जज (सीनियर डिविजन) कम ज्यूडिशल मजिस्ट्रेट की कोर्ट्स स्थापित करने के लिए प्रयास होने चाहिए। न्यायिक अदालतों की स्थापना के बगैर अंबाला कैंट सब डिवीज़न आधी अधूरी ही है।
लगातार कैंट की बार एसोसिएशन का होता है चुनाव
गत कुछ वर्षो से अंबाला कैंट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का चुनाव भी हो रहा है। अब दिसंबर में भी ताजा चुनाव होना प्रस्तावित है। अधिवक्ता हेमंत बताते हैं कि एसडीएम (उप मंडल अधिकारी - नागरिक ) जो एक एग्जीक्यूटिव (कार्यकारी) मजिस्ट्रेट ही होता है और तहसीलदार आदि जैसे अन्य एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट या अधिकारियों के समक्ष ही पेश होना अधिवक्ताओं का कार्य नहीं होता बल्कि न्यायिक अधिकारियों या जजों के सामने पेश होकर सिविल और क्रिमिनल मामलों में मुवक्किल की पैरवी करना बार के सदस्यों का मुख्य कार्य है।
अंग्रेजों के कार्यकाल में कैंट में होती थी अदालत
अंग्रेजी शासनकाल के समय से कैंट में न्यायिक अदालतें हुआ करती थीं। जो मुख्यतः कैंटोनमैंट ( सैन्य) क्षेत्र के लिए स्थापित की गईं थीं। हालांकि वर्ष 1990 के मंडल कमीशन (ओबीसी आरक्षण) विरोध आंदोलन के फलस्वरूप अस्थायी तौर पर कैंट की अदालतों को पहले शहर की पुरानी सेशंस कोर्ट में और वर्ष 2003 में मौजूदा न्यायिक परिसर में शिफ्ट कर दिया गया था। बाद में वर्ष 2009 में हाईकोर्ट द्वारा कैंट की अदालतों का शहर की कोर्ट्स में ही विलय कर दिया गया था।