अंबाला छावनी के अटल कैंसर केयर केंद्र का ऑपरेशन थियेटर। संवाद
अंबाला। अटल कैंसर केयर केंद्र में ब्रेन कैंसर के लिए फायदेमंद कैविट्रॉन अल्ट्रासोनिक सर्जिकल एस्पिरेटर (सीयूएसए यानी क्यूसा मशीन) का तीन माह से इस्तेमाल नहीं हो रहा है। अप्रैल 2025 में एक मात्र न्यूरो सर्जन के नौकरी छोड़ने के बाद से यह मशीन ऑपरेशन थियेटर में महज शोपीस बनी हुई है, जबकि उनके द्वारा इसका इस्तेमाल ज्यादा किया जाता था। पहले न्यूरो सर्जन की ओपीडी 150 तक रहती थी। हरियाणा के अलावा दूसरे राज्यों से भी मरीज उपचार के लिए उनके पास आते थे लेकिन अब जो मरीज आ रहे हैं वो अन्य विशेषज्ञ की ओपीडी में चक्कर काट रहे हैं, साथ ही उनके जाने के बाद अभी तक एक भी न्यूरो के मरीज का ऑपरेशन नहीं हुआ है। इसलिए मशीन भी इस्तेमाल में नहीं लाई जा रही है।
निजी अस्पतालों में इसी मशीन से उपचार के लिए आता है 6 से 7 लाख का खर्च
क्यूसा मशीन अत्याधुनिक मशीन है। निजी अस्पतालों में संबंधित मरीज इस मशीन से उपचार करवाता है तो उसका 6 से 7 लाख रुपये तक का खर्च आता है। जबकि चंडीगढ़ व रोहतक पीजीआई में लोगों को चक्कर काटने पड़ते हैं। जबकि अटल कैंसर केयर केंद्र में यह मशीन है, लेकिन उसके इस्तेमाल के लिए न्यूरो सर्जन ही नहीं है। विभाग की तरफ से पिछले तीन माह से नए डॉक्टर का इंतजार किया जा रहा है। इससे पहले न्यूरो सर्जन के तौर पर डॉ. कार्तिक नांदरा कई सालों से सेवाएं दे रहे थे। एनएचएम के तहत उन्होंने अपना कांट्रेक्ट आगे नहीं बढ़ाया था।
न्यूरो सर्जन न होने के कारण क्यूसा मशीन का इस्तेमाल संबंधित मरीजों के लिए नहीं हो रहा है। लीवर के कैंसर के मरीज आते हैं तो उनका उपचार इसी मशीन से किया जाता है। एनएचएम के तहत न्यूरो सर्जन की नियुक्ति होनी है।
- डॉ. जतिंद्र, आरएमओ, कैंट के नागरिक अस्पताल