अंबाला। रेलवे के पुलिस अधीक्षक से निर्देश मिलने के बाद डीएसपी ने सीआईए से घटनाक्रम की जानकारी मांगी है कि किस प्रकार नशा तस्कर सीआईए थाने से भाग गया और उसे पकड़ने के लिए अब तक क्या-क्या कार्यवाही की गई। प्राथमिक जानकारी में यह सामने आया है कि इस मामले में सीआईए कर्मचारियों की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है कि नशा तस्कर पर मुकदमा दर्ज होने के बाद भी उसे जीआरपी थाने के हवालात में क्यों नहीं रखा गया।
इस संबंध में आरोपित पांच जीआरपी के कर्मचारियों से भी पूछताछ शुरु कर दी गई है ताकि उनके बयानों का मिलान किया जा सके। जबकि दूसरी तरफ आरोपी को पकड़ने के लिए जीआरपी की छापेमारी भी लगातार जारी है। हालांकि इस मामले की जांच के लिए जीआरपी के डीएसपी को 45 दिन का समय दिया गया है। वहीं सीआईए टीम सहित जीआरपी की पूरी कोशिश है कि आरोपी को 45 दिन खत्म होने से पहले ही पकड़ लिया जाए। इस कार्रवाई में हिमाचल पुलिस और मुखबिरों का सहयोग लगातार लिया जा रहा है।
यह था मामला
सीआईए ने 13 नवंबर को अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन के परिसर से मंडी हिमाचल निवासी नरेंद्र को 400 ग्राम चरस के साथ पकड़ा था। उसके खिलाफ जीआरपी थाने में मामला दर्ज किया लेकिन इस दौरान आरोपी को जीआरपी थाने में रखने की बजाए सीआईए अपने साथ ले गई, वहीं शातिर आरोपी 14 नवंबर की सुबह लगभग चार बजे शौच करने के बहाने कर्मचारियों को चकमा देकर फरार हो गया। इस मामले को लेकर सीआईए प्रभारी विलायती राम की शिकायत पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले उप.नि. परमजीत सिंह, सिपाही कृष्ण कुमार नंबर 560, सिपाही अनिल कुमार, सिपाही पवन कुमार व सिपाही कृष्ण 28 के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।