अंबाला। पुलिस से बिल्कुल डरने की जरूरत नहीं है। यह आपके और आपके अधिकारों की सुरक्षा के लिए है। बिना डर और झिझक के पुलिस को अपना दोस्त मानकर अपनी बात कह सकते हैं।
यह बात बलदेव नगर थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर रमेश कुमार ने बुधवार अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से रखे दोस्त पुलिस कार्यक्रम में कही। इस दौरान पुलिस अधिकारी ने परिसर में पहुंचे राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल पुलिस लाइन के ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के 50 विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं को शांत किया।
छात्रों ने थाने की कार्यशैली को भी जाना। इस मौके पर एएसआई करन सिंह राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल पुलिस लाइन के प्रिंसिपल गुरिंद्र सिंह गिल और दूसरे शिक्षक मौजूद रहे।
छात्रों को बेबाकी से दिए सवालों के जवाब
अपना दोस्त कार्यक्रम में अधिकारियों ने छात्राओं के प्रश्नों का बेबाकी से जवाब दिया और उन्हें कानून का पाठ पढ़ाया। एसआई प्रिया ने छात्रों को यातायात नियमों के बारे में बताते हुए कहा कि सड़क पर चलते समय हेलमेल का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। एसआई अमित ने साइबर क्राइम बारे जानकारी देते हुए किसी भी अजनबी को ओटीपी न देने और उनका फोन न उठाने बारे बताया। रवि कुमार ने डायल-112 नंबर बारे जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में इस नंबर का इस्तेमाल कर मदद ली जा सकती है।
कुछ इस तरह मिले सवालों के जवाब
प्रश्न : एफआईआर क्या होती है और कैसे दर्ज की जाती है : अदित्य
उत्तर- एफआईआर को प्रथम सूचना रिपोर्ट कहा जाता है। एफआईआर में शिकायतकर्ता का नाम, पता, मोबाइल, क्या अपराध हुआ है और अपराध के आरोपी से जुड़ी जानकारी जैसी जरूरी बातों के बारे में लिखा जाता है।
प्रश्न : डिजिटल अरेस्ट क्या होता है : युगम
उत्तर - डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं होता है। यह एक साइबर अपराध है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम में फोन करने वाले कभी पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स, आरबीआई और दिल्ली या मुंबई पुलिस अधिकारी बनकर बात करते हैं। ऐसे स्कैम से सावधान रहें।
पुलिस ने किया प्रश्न, पूछा डायल-112 का लाभ किसने उठाया
छात्र ऋतिक ने कहा कि उनके घर के पास एक व्यक्ति नशे में हंगामा कर रहा था। गाड़ी पर भी पत्थर मार रहा था। तुरंत डायल-112 पुलिस को फोन कर दिया था। वहीं, छात्रा साया ने बताया कि डायल-112 से पुलिस की मदद लेना बेहद आसान हो गया है। इलाके में कोई ऊंची-ऊंची आवाज में गाने चलाकर शोर मचा रहा था। तभी फोन पर डायल-112 को सूचित कर दिया था।