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अंबाला: किसानों ने पूरे उत्साह के साथ किया आंदोलन की जीत का इजहार, गुरुपर्व के साथ मनाई दिवाली

Sat, 20 Nov 2021 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो राजेश शांडिल्य, अमर उजाला ब्यूरो, अंबाला (हरियाणा)

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार की सुबह गुरु नानक देव जी महाराज के प्रकाशोत्सव पर तीन कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की। देखते ही देखते शंभू बार्डर पर किसानी जत्थों की भीड़ जमा होने लगी। घोषणा के बाद कई राजनीतिक दलों के नेता भी शंभू बार्डर की ओर कूच करते हुए दिखे।
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शंभू बॉर्डर पर नृत्य करते बच्चे व अन्य। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गुरुपर्व पर तीन कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद अंबाला में शंभू बार्डर पर होली-दिवाली जैसा नजारा रहा। यहां कृषि कानूनों के विरोध में करीब एक साल से जारी धरने पर बैठे किसानों ने आंदोलन की जीत का इजहार पूरे उत्साह के साथ किया। गीत संगीत के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप पर किसानों ने खूब भांगड़ा किया। वहीं जमकर आतिशबाजी की गई। किसानों ने एक दूसरे को गले लगाकर बधाइयां दी।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार की सुबह गुरु नानक देव जी महाराज के प्रकाशोत्सव पर तीन कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की। इसके बाद धरनास्थल शंभू बार्डर का नजारा बदल गया। देखते ही देखते शंभू बार्डर पर किसानी जत्थों की भीड़ जमा होने लगी।

वहीं राजनीतिक दलों के नेताओं विशेषकर विपक्षी दलों के नेता भी किसानों को बधाइयां देने शंभू बार्डर पर पहुंचे। कोई यहां जलेबी की टोकरी लेकर पहुंचा तो कोई मोती चूर के लड्डू लेकर आया। धरनास्थल पर जिस व्यंजन ने यहां सब की वाह वाही कराई वो थी बड़े बड़े पतीलों में कढ़ कर तैयार हुई खीर, जिसे जीटी रोड से गुजरते राहगीरों ने भी गाड़ियां रोक रोक कर चखा।
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इनमें गुरुग्राम के बड़े कारोबारी विकास, ज्योति एवं परिवार के सदस्यों सहित अन्य कई लोग शामिल रहे। वहीं हाथों में किसान संगठनों के झंडे लेकर एक लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बधाई दी। इस दौरान फतेह, फतेह, फतेह की गूंज भी सुनाई दी।

चोपड़ा फैमिली की बधाई, सेल्फी और डांस मस्ती
गुरुग्राम की चोपड़ा फैमिली पंजाब से अपने घर लौट रही थी। रास्ते में शंभू बार्डर पर इन्हें किसानों का जश्न इतना भा गया कि गाड़ी को सड़क पर खड़ा कर उन्हें पहले बधाई दी, फिर किसानों के संग सेल्फी ली और फिर डांस मस्ती करने के बाद यहां परोसी जा रही लजीज खीर और लंगर प्रसाद छका। विकास चोपड़ा और ज्योति का कहना था कि इससे आज उनका दिन खास बन गया, जो लंबे समय तक याद रहेगा।

नन्हें भाई बहन ने जन्मदिन का केक भी शंभू बार्डर पर ही काटा था
तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की खुशी में अंबाला जग्गी कालोनी वासी सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली अभिनूर और पहली कक्षा में पढ़ने वाले उसके छोटे भाई अनवीर और इनके पिता कमल सिंह विर्क शुक्रवार को शंभू बार्डर पर जमकर झूमे। बता दें कि 5 जनवरी 2021 को अभिनूर और 9 जनवरी 2021 को उसके छोटे भाई ने अपने जन्मदिन का केक भी किसानों के साथ शंभू बार्डर पर चल रहे धरनास्थल पर ही काटा था। अपने पिता के साथ यह दोनों बहन भाई लगातार यहां किसान संगठन का झंडा लेकर आते थे।

भारत सरकार ने नहीं, गुरुकृपा से वापस हुए कानून : अभिनूर
सातवीं कक्षा की छात्रा अभिनूर ने प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद शंभू बार्डर पर बातचीत में कहा कि भारत सरकार ने शुक्रवार को गुरुनानकदेव जी के प्रकाशोत्सव पर जो तीन कानून वापस लेने का फैसला लिया है, वह सरकार ने नहीं, बल्कि उनके गुरु महाराज जी की कृपा से संभव हुआ है। इतनी छोटी उम्र में किसानों के मुद्दों और सरकार के फैसलों के बारें उसे इतनी जानकारी कैसे है? इस सवाल के उत्तर में अभिनूर का जवाब था कि वह ज्यादा भले नहीं जानती, मगर इतना जरूर जानती है कि इतनी बड़ी संख्या में किसान सड़क पर आए हैं तो जरूर कुछ गलत था।

श्रद्धांजलि देते हुए बोले- सैकड़ों के बलिदान से नसीब हुआ ये दिन
शंभू बार्डर धरनास्थल के प्रभारी वजिंदर सिंह कंबोज, गुरुद्वारा मर्दो साहिब पातशाही नौवीं और दसवीं की प्रबंधन समिति के प्रधान जरनैल सिंह बढौला और किसान नेता लाली भानोखेड़ी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद खुशी का इजहार करने से पहले आंदोलन में शहीद हुए सैकड़ों किसानों को श्रद्धांजलि दी। कहा कि सैकड़ों किसानों ने इस आंदोलन के खातिर अपने परिवार, बच्चों की चिंता छोड़ खेती को बचाने के लिए बलिदान दिया है, जिसके कारण आज सरकार को झुकना पड़ा है।

शंभू बॉर्डर पर ढोल की धुन पर नृत्य करते हुए।

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अस्सी गले लगणा वी जाणदे हां ते गले पड़ना वी...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुक्रवार को तीन कृषि बिलों को वापस लेने की घोषणा के बाद कई राजनीतिक दलों के नेता भी शंभू बार्डर की ओर कूच करते हुए दिखे। जैसे ही एक नेताजी ने वहां किसान नेताओं को बधाई देते हुए जादू की झप्पी दी तो किसान नेता भी पूरी शिद्दत से गले लगे, मगर इसी बीच कुछ ऐसा हुआ कि एक किसान ने नेताजी को कह डाला कि अस्सी गले लगणा भी जाणदे हां और गले पड़ना भी...। इसके बात नेता जी थोड़ा सकपकाए, थोड़ा मुस्कुराए और चलते बने।

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