अंबाला सिटी। अदालत ने जमीन विवाद और वसीयत में धोखाधड़ी से जुड़ी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हितेश गर्ग की अदालत ने स्पष्ट किया कि जमीन की वसीयत और दाखिल-खारिज से जुड़े विवाद मुख्य रूप से दीवानी प्रकृति के होते हैं। इन्हें तब तक आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता जब तक जालसाजी के ठोस सबूत न हों।
गांव सुभरी निवासी ओम प्रकाश ने आरोप लगाया था कि उनके चाचा रत्ती राम, जो कि नि:संतान थे। उन्होंने 19 जून 2006 को उनके और उनके भाई बख्शी राम के नाम एक पंजीकृत वसीयत की थी। रत्ती राम की मृत्यु के बाद जमीन का म्यूटेशन भी उनके नाम हो गया था।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि आरोपियों ने मिलीभगत कर जमीन हड़पने के लिए फर्जीवाड़ा किया। नायब तहसीलदार ने बिना किसी नोटिस के म्यूटेशन रद्द कर नया म्यूटेशन कर दिया। इससे पहले, न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 16 सितंबर 2017 को इस शिकायत को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ ओम प्रकाश ने सत्र न्यायालय में अपील की थी। संवाद