अंबाला। अंबाला में हरियाणा रोडवेज के विभिन्न डिपो की बसों की खराब हालत और खामियों को दूर करने अभियान चलाया गया था। इस अभियान के बाद संस्थाओं व वरिष्ठ नागरिकों के साथ छावनी के अमर उजाला कार्यालय में संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में संस्था और समाजसेवियों से बातचीत की गई। उन्होंने बसों की समस्याओं से लेकर खामियां बताई और उनसे जुड़े सुझाव भी साझा किए।
बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधा होनी चाहिए, जीपीएस सिस्टम होना चाहिए, राजमार्ग पर चालक गति सीमा को नियंत्रण में नहीं रखते। टांगरी बांध से छावनी बस अड्डे पर राजमार्ग पर भीड़ होने के पर भी चालक बसों की गति कम नहीं करते। डैश बोर्ड पर सिस्टम हो, इससे सवारी उतरने और चढ़ने के बारे में पता चल सके, वहीं अधिकतर बसें क्यू शेल्टर पर नहीं रुकती हैं।
- अजय गुलाटी, प्रधान, मेन सदर बाजार एसोसिएशन, छावनी।
सभी बसों में सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए, अक्सर देखा गया है कि बसों में फर्स्ट एड किट रखी होती है, लेकिन इनमें दवाइयां नहीं होती। बसों में फायर सेफ्टी सिलिंडर नहीं होते, अगर होते हैं तो वो एक्सपायर होते हैं। अधिकारियों को यात्रियों की सुविधा को देखते हुए इन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- जंगशेर शर्मा, अध्यक्ष, राष्ट्रीय परशुराम सेना ब्रह्मवाहिनी, अंबाला।
अकसर देखा गया है कि राजमार्ग के किनारे अधिकतर वाहन खड़े रहते हैं, इस कारण हाईवे पर जाम की स्थिति बनी रहती है, वहीं दूसरी ओर बसें समय पूरा करने के चक्कर में तेज भागती हैं। इससे हादसा हाेने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा आरटीए को रूटीन में बसों की जांच करनी चाहिए जो नहीं होती।
- सुरेंद्र राजू, भगवान परशुराम सेवा समिति अंबाला छावनी।
अंबाला छावनी में कई मार्ग पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है, जबकि यह मार्ग छोटे और संकरे हैं। इसलिए यहां बड़ी बसें चलना मुश्किल होता है। इन बसों को मोड़ काटने में ज्यादा परेशानी होती है, इसलिए इन बसों की जगह मिनी बसों का संचालन किया जाए।
- डाॅ. राकेश भारद्वाज,सजाजेसवी।
पंजाब से आने वाली अधिकतर बसें अंबाला छावनी बस स्टैंड के सामने पर ओवरब्रिज पर रुकती हैं और यात्रियों को यहीं उतार देती हैं। इस कारण यात्रियों को पैदल ही वापस बस अड्डे की तरफ आना पड़ता है और इससे रात के समय हादसा होने का अंदेशा बना रहता है।
- सुरेश कौशिक, समाजसेवी।
खुले रुपयों को लेकर यात्रियों और परिचालक के बीच अक्सर विवाद होता रहता है। विभाग को बसों में क्यू आर कोड या फिर स्केनर जारी करना चाहिए ताकि यात्री स्केन करके टिकट का भुगतान कर सें। राजमार्ग पर जगह-जगह खड़ी सवारियों को देखकर चालक बसों को रोकते हैं जो गलत है, इससे सड़क जाम की स्थिति भी बनती है।
- ओंकार नाथी, समाजसेवी, अंबाला छावनी।
सरकार चार श्रेणियों में चला रही बसें
सरकार की ओर से बसों को चार श्रेणियों में रखा गया है। किलोमीटर स्कीम के तहत सरकार को 28 रुपये के हिसाब से कंपनी को रुपये देने होते हैं, इलेक्ट्रिक बस इसमें सरकार को करीब 66 रुपये कंपनी को देने हैं, लेकिन इन बसों को लोकल मार्ग पर सवारी नहीं मिल रही है। इसके अलावा कंपनी बसों का रखरखाव पास रखती है।
- पवन शर्मा, समाजसेवी।
अंबाला में बसों की हालत ठीक नहीं है। आज भी अंबाला में बीएस 4 की बसों का संचालन हो रहा है। इसके अलावा बसों में सीटें फटी हुई हैं, यात्री इन फटी हुई सीटों पर बैठने को मजबूर हैं, लेकिन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।
- अशोक शर्मा, समाजसेवी, अंबाला छावनी।
अंबाला छावनी में संवाद कार्यक्रम में मौजूद संस्थाओं के पदाधिकारी और समाजसेवी। संवाद
अंबाला छावनी में संवाद कार्यक्रम में मौजूद संस्थाओं के पदाधिकारी और समाजसेवी। संवाद
अंबाला छावनी में संवाद कार्यक्रम में मौजूद संस्थाओं के पदाधिकारी और समाजसेवी। संवाद
अंबाला छावनी में संवाद कार्यक्रम में मौजूद संस्थाओं के पदाधिकारी और समाजसेवी। संवाद
अंबाला छावनी में संवाद कार्यक्रम में मौजूद संस्थाओं के पदाधिकारी और समाजसेवी। संवाद
अंबाला छावनी में संवाद कार्यक्रम में मौजूद संस्थाओं के पदाधिकारी और समाजसेवी। संवाद
अंबाला छावनी में संवाद कार्यक्रम में मौजूद संस्थाओं के पदाधिकारी और समाजसेवी। संवाद
अंबाला छावनी में संवाद कार्यक्रम में मौजूद संस्थाओं के पदाधिकारी और समाजसेवी। संवाद