अंबाला। श्री बांके बिहारी मंदिर गोविंद नगर के 50 वें स्वर्णिम वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में रोजाना सैकड़ों भक्त पहुंचकर जीवन संवार रहे हैं। कथा के तीसरे दिन बंगलौर से पधारे वैदिक बटुक रघुनंदन प्रतिदिन ईश्वर के ही स्वरूप वेद भगवान का उच्चारण कर रहे हैं।
मंदिर समिति सहित सभी श्रद्धालु वेद ध्वनि का लाभ ले रहे हैं। महाराज ने कथा का वर्णन करते हुए बताया कि संत हमेशा कृपालु होते हैं एवं संतों की वाणी कभी विफल नहीं होती अतः हमें संतों का सानिध्य करना चाहिए एवं उन्हें आदर सत्कार देना चाहिए। जब भी कोई सुनने सुनाने वाला न मिले तो भगवान का नाम स्मरण करना चाहिए और जब भी अवसर मिले ठाकुर का नाम ले लेना चाहिए।
मनुष्य को सोने के भ्रम में नहीं रहना चाहिए क्योंकि अंतिम सत्य तो सोना ही है क्योंकि हम वह बुलबुले हैं, जिसे एक दिन फुट जाना है, इसलिए हर रोज सोते जागते ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए। महाराज ने ध्रुव चरित्र, भरत चरित्र, भक्त प्रहलाद एवं अजामिल चरित्र पर विस्तृत व्याख्यान कर मंदिर में आए श्रद्धालुओं को स्वामी सुखदेव द्वारा कही गई कथा सुनाई।
संगीत में भजनों मेरा तार प्रभु से जोड़ों कि ऐसा कोई संत मिले..., वाह वाह रे मौज फकीरा दी...., प्रहलाद को लग गई राम रतना..., कई लाखों तर गए हैं तेरा नाम जपते जपते आदि से सभी श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। महाराज ने ओम ध्वनि व प्राणायाम को भी जीवन का हिस्सा बनाने की शिक्षा दी। उन्होंने काम, क्रोध, मद (अहंकार) लोभ और इंद्रियों को वश में रख, भगवान का चिंतन करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कथा में अद्वैत अग्नि अखाड़े से परम श्रद्धेय संत श्री श्री 1008 स्वामी रामा अंकित महाराज कथा सुनने एवं स्थानीय श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद देने के लिए पधारे। श्री राधा परमार्थ सेवा समिति अंबाला कैंट से प्रधान धीरज शर्मा एवं टीम के अन्य सदस्य सहित महिला सदस्य कथा श्रवण करने के लिए उपस्थित रहे। कथा में बहन संतोष बुद्धि राजा, शकुंतला देवी, किरण दीवान, कमला शर्मा, विजय, सोनिया मेहता, किरण चोपड़ा, पार्वती, पंडित हेमराज एवं सभा प्रधान दिनेश बहल, पुनीत वर्मा, राकेश कुमार, सतीश चंद्र दुआ, रमेश चंद्र, अश्विनी गुप्ता एवं सभी सदस्य उपस्थित रहे।
श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा को सुनते भक्तगण। संस्था