- स्वच्छता रैकिंग में सुधार करने का दावा, चार दिशाओं में बने अनधिकृत डंपिंग जोन
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। नगर परिषद अंबाला सदर के स्वच्छता दावों की पोल खुल रही है। जमीनी हकीकत रैंकिंग में सुधार की उम्मीदों पर पानी फेर रही है। सफाई व्यवस्था के लिए 500 सफाई कर्मियों और वार्ड स्तर पर 30 सुपरवाइजरों की तैनाती के बावजूद छावनी में गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। आलम यह है कि गंदगी से अटे नाले और चौक-चौराहों पर बिखरा कचरा परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
छावनी के चारों कोनों पर बने अनधिकृत डंपिंग जोन स्वच्छता अभियान को आईना दिखा रहे हैं। बोह क्षेत्र में नाले पूरी तरह गंदगी से अटे हैं। इससे पानी की निकासी ठप है। वहीं, रंगिया मंडी में सड़क किनारे बने डंपिंग जोन ने राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है। एकता विहार और गांधी मैदान के पास लगे कूड़े के अंबार न केवल बीमारी को न्योता दे रहे हैं, बल्कि सर्वेक्षण में परिषद के अंकों को भी कम कर रहे हैं।
पिछली बार मिले थे शून्य अंक
पिछले वर्ष के स्वच्छता सर्वेक्षण परिणामों ने परिषद की पोल खोल दी थी। प्रदेश की रैंकिंग में परिषद 245वें स्थान पर पिछड़ गई थी। 9500 अंकों में से परिषद को 3700 के करीब अंक ही मिल पाए थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि वेस्ट जनरेशन, प्रोसेसिंग और कूड़ेदानों के निवारण जैसे महत्वपूर्ण मानकों में परिषद को शून्य अंक हासिल हुए थे।
बदहाली के मुख्य कारण
छावनी में कूड़ा निस्तारण में अव्यवस्था सामने आई है। 500 कर्मचारी होने के बाद और डोर-टू-डोर कलेक्शन स्तर पर निजी कर्मचारियों की तैनाती के बाद भी लोग खुले में सड़कों पर कूड़ा फेंक रहे हैं। 30 सुपरवाइजरों की मौजूदगी के बाद भी नालों की सफाई कागजों तक सीमित है। सबसे बड़ी दिक्कत कचरे के निपटान को लेकर है, इसकी व्यवस्था धरातल पर न के बराबर है।
सफाई व्यवस्था को सुधारा जा रहा है। जहां भी गंदगी की शिकायत मिल रही है, वहां अतिरिक्त टीमें भेजी जा रही हैं। डंपिंग प्वाइंट्स को खत्म करने के लिए प्रक्रिया चल रही है।
- सुनीत दत्त, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर परिषद सदर, अंबाला