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हद: डिप्टी डायरेक्टर को ही बेच दिया किताबों का सैट

Wed, 13 Apr 2016 01:33 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, अंबाला
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‌किताबें - फोटो : demo pic
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प्राइवेट स्कूलों में अभी भी प्राइवेट पब्लिशरों की किताबें धड़ल्ले से बेची जा रही है। प्राइवेट स्कूल संचालकों व मालिकों की शह पर प्राइवेट पब्लिशरों ने स्कूलों के अंदर ही किताबों की दुकानें खोल रखी है। यही नहीं इन दुकानों पर बच्चों को महंगी दरों पर किताबें बेची जाती है। बेबस अभिभावक भी इन किताबों को खरीदने पर मजबूर है। इसी को लेकर अमर उजाला ने प्राइवेट स्कूल संचालकों की मनमानियों पर विभिन्न समाचार ‘स्कूलों की मनमानी रोकने पर शिक्षा विभाग नाकाम’, ‘ड्रेस में कमीशन का खेल’, अभिभावकों पर भारी’ और ‘कैमरे की नजर में होगी स्कूल वाहनों की पासिंग’ शीर्षक से सिलेसिलेवार समाचार भी प्रकाशित किए।
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इस मुहिम का असर मंगलवार को उस समय देखने को मिला जब हरियाणा शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जिले सिंह अत्रेय ने इसी पर संज्ञान लेते हुए सिटी के एक स्कूल में अचानक छापामारी कर दी। स्टिंग रूपी इस आपरेशन में डिप्टी डायरेक्टर एवं डीईओ ने स्वयं ग्राहक बनकर स्कूल में चल रही प्राइवेट पब्लिशरों की दुकान के रहस्यमयी खेल का पर्दाफाश किया।

 ...जब डिप्टी डायरेक्टर ने ग्राहक बन खरीदी किताबें
स्कूल प्रांगण में किताबों की बिक्री की शिकायत मिलने पर अत्रेय ने मंगलवार दोपहर सवा दो बजे विद्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि विद्यालय प्रांगण के कमरे से किताबें बेची जा रही है। कक्षा नर्सरी की पाठ्यपुस्तकों का एक सैट डिप्टी डायरेक्टर ने खुद ग्राहक बनकर खरीदा और उसकी मौके पर फोटो भी करवाई।
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जांच करने पर विद्यालय प्रांगण में सभी कक्षाओं की किताबें बिक्री के लिए स्टॉक में उपलब्ध पाई गई। डिप्टी डायरेक्टर ने जब नर्सरी कक्षा की खरीदी गई किताबों के सैट की रसीद मांगी तो उन्होंने बिना हस्ताक्षर के पंफलेट नुमा एक कागज उन्हें थाम दिया। पूछे जाने पर विक्रेता ने बताया कि कमरे से इन किताबों और लेखन सामग्री की बिक्री प्रबंधन समिति और प्रधानाचार्य की सहमति से की जा रही है और कमरा भी उन्हीं द्वारा उपलब्ध करवाया गया है।

मनमानियों पर कसेगा शिकंजा
डिप्टी डायरेक्टर जिले सिंह अत्रेय ने बताया कि 26 मार्च को सभी प्राइवेट स्कूलों की बैठक आयोजित करके उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि स्कूल अपने प्रंागण में व्यापारिक गतिविधियां नहीं चलाएंगे। विशेष तौर पर किताबों, स्टेशनरी और वर्दी का उल्लेख किया गया था।

इस संबंध में सभी विद्यालयों को माननीय उच्च विद्यालय द्वारा पारित सीडब्ल्यूपी नंबर 4779 ऑफ 2016 के आदेश दिनांक 14 मार्च 2016 की सख्ती से अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया था। यही नहीं इसके उपरांत 30 मार्च को उपायुक्त अंबाला अशोक सांगवान ने भी प्राइवेट स्कूलों के मुखियाओं की बैठक आयोजित करके उन्हें स्कूल प्रांगण से किताबें, वर्दी व स्टेशनरी न बेचने तथा प्रतिवर्ष दाखिले के नाम पर नियमों से अधिक फीस वसूली न करने के आदेश दिये थे। विद्यालय मुखियों को इस बात के लिए भी आगाह किया गया था कि यदि इस तरह की गतिविधियां पाई गई तो उनके विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। लेकिन इसके बावजूद भी कुछ स्कूलों ने गंभीरता नहीं दिखाई। लेकिन अब ऐसे स्कूलों पर विशेष रूप से शिकंजा कसा जाएगा।

पीकेआर जैन पब्लिक स्कूल सिटी ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के आदेशों की पालना करने में कोई रूचि नहीं दिखाई और प्रशासन के आदेशों की अवहेलना की। इसलिए शिक्षा विभाग हरियाणा के  निदेशक को इस विद्यालय की एनओसी वापिस लेने के लिए लिखित अनुरोध कर दिया गया है। समाचार पत्रों में छपे समाचारों पर विभाग ने पूरी गंभीरता दिखाई है।
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-जिले सिंह अत्रेय, डिप्टी डायरेक्ट, अंबाला







 
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