अंबाला सिटी। पिटाई और धमकी देने के मामले में अदालत ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हितेश गर्ग की अदालत ने आरोपी विजेंद्र पाल सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने अपने 11 पन्नों के फैसले में कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं, जिसके आधार पर आरोपी को बरी किया गया।
इसमें वारदात 14 नवंबर 2016 की बताई गई, जबकि प्राथमिकी 28 नवंबर को यानी करीब 14 दिन बाद दर्ज कराई गई। अभियोजन पक्ष इस देरी का कोई ठोस कारण नहीं बता सका। घटना घनी आबादी वाले इलाके में हुई थी, फिर भी पुलिस ने किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया।
गवाही देने वाले सभी लोग शिकायतकर्ता के परिवार के ही सदस्य थे। इलाके में सीसीटीवी कैमरे लगे होने की बात स्वीकार की गई थी, लेकिन पुलिस ने जांच के दौरान न तो फुटेज कब्जे में ली और न ही उसे कोर्ट में पेश किया। यहां तक कि मेडिकल रिपोर्ट तक पेश नहीं की गई। इसी अधार पर कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया। ब्यूरो
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वर्ष 2022 में सीजेएम कोर्ट ने सुनाई थी सजा
यह मामला 14 नवंबर 2016 का है। आरोप था कि आरोपी विजेंद्र पाल ने मिलप नगर स्थित शिकायतकर्ता सरबजीत वर्मा के घर में घुसकर उनके साथ मारपीट की और परिवार को जान से मारने की धमकी दी । इस संबंध में अंबाला सिटी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सीजेएम कोर्ट ने 2 सितंबर 2022 को विजेंद्र पाल को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ आरोपी ने उच्च अदालत में अपील दायर की थी।