अंबाला। सिंचाई विभाग की ओर से टांगरी की 40 किलोमीटर क्षेत्र की मानसून से पहले खोदाई करानी थी। अब मानसून आने में कुछ ही दिन शेष रह गए हैं मगर अभी तक एजेंसियों ने काम नहीं शुरू किया है। इस काम में लेटलतीफी की जा रही है।
इस काम का ठेका भी 30 जून तक का बताया जा रहा है। एक बार टांगरी में पानी आया तो इसके बाद खोदाई का कार्य नहीं हो सकेगा और अंबाला कैंट में बाढ़ आने का खतरा और बढ़ जाएगा। इस टेंडर के तहत एनएचएआई और सिंचाई विभाग के ठेकेदारों ने बोली में भाग लिया था। उन्हें ठेके मिल गए हैं।
इसमें करीब 10 लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी की खोदाई करानी है। इससे पहले टांगरी में एनएचएआई और नगर परिषद के एमओयू के तहत कुछ खोदाई कराई है। जिसमें उन्हें 5 लाख क्यूबिक मीटर टन मिट्टी मिली है। मगर इसका भी लक्ष्य 10 लाख क्यूबिक मीटर का था।
22 गांवों को है खतरा
दरअसल टांगरी नदी बरसाती नदी है। इसमें हिमाचल प्रदेश से बारिश का पानी आती है। पिछली बार पहाड़ाें पर अत्यधिक बारिश से छावनी में कई गांव व शहरी इलाका प्रभावित हुआ था। इस बार सिंचाई विभाग ने सर्वे कर 22 गांवों के क्षेत्रों को चिन्हित किया। मगर खोदाई कार्य शुरू न होने से इन गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। यह गांव पंजाब बॉर्डर से अंबाला कैंट तक के हैं।
इन अड़चनों से हो रही देरी
-टेंडर देरी से लगाया गया। इस कारण से एजेंसी को खोदाई के लिए पर्याप्त समय ही नहीं मिलेगा।
-टांगरी के 40 किलोमीटर के क्षेत्र को अब खोदाई होन पर 15 दिनों में कवर नहीं किया जा सकता है। क्योंकि लगभग 15 दिनों में मानसून की बारिश आ जाएगी। इसके बाद सभी कार्य बंद हो जाएंगे।
-टांगरी की खोदाई से पहले उसे कहां से खोदना है और किस प्रकार से खोदना है उसका भी ध्यान रखना होगा। इस कार्य के आकलन में भी समय लगेगा।
-टांगरी को 500 से 600 फुट खोदकर चौड़ा करना है। ऐसे में एक साथ कई मशीनें लगाने पर ही काम संभव हो सकेगा।