अंबाला सिटी। नाबालिगों के साथ यौन अपराध होने के बाद कई ऐसी समस्याएं पहाड़ की तरह खड़ी होती हैं, जिन्हें पार करना नामुमकिन होता है। मामला जब दुष्कर्म का हो तो टूटते मोतियों को पिरोने जैसी बात होती है।
अंबाला शहर की एक नाबालिग के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। वह दो बार दुष्कर्म की शिकार बनी। दोनों बार गर्भवती हो गई। हैरानी की बात तो यह है कि छह माह के भीतर 13 वर्षीय बच्ची के साथ दोनों हादसे हुए। इस बच्ची के लिए रक्षक बनने का काम बाल कल्याण समिति यानि सीडब्ल्यूसी ने किया। सीडब्ल्यूसी ने बच्ची का पहली बार भी गर्भपात कराया और दूसरी बार जब वह गर्भपात के लिए राजी नहीं थी तो उसकी काउंसिलिंग कर उसे समझाया और गर्भपात के लिए तैयार किया।
इतना ही नहीं पहले मामले में बच्ची की रिलीफ फंड से आर्थिक मदद की गई तो दूसरी बार में बच्ची ने बच्ची अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए सिलाई मशीन की मांग की तो वह भी चेयरपर्सन ने दिलाने में मदद की। ऐसे मामलों में सीडब्ल्यूसी इसलिए भी गर्भपात करा सकी, क्योंकि बच्ची शुरुआती महीनों की गर्भवती थी। अन्यथा एक समय निकलने के बाद बच्ची का गर्भपात कराना चुनौती बन जाता।
दोनों मामलों में पॉक्सो एक्ट में केस
सीडब्ल्यूसी की चेयरपर्सन रंजीता बताती हैं कि पीड़िता से जुड़ा पहला मामला उनके पास जून 2023 में आया था। उसके पिता की तबीयत खराब रहती थी। वह अक्सर पिता के एक जानकार व्यक्ति के घर अपने बहन भाइयों के साथ चली जाती थी। यहां पर इस व्यक्ति ने नाबालिग को अपनी हवस का शिकार बनाया। जब मामला आया तो बच्ची का अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल में परीक्षण कराया गया, जिसमें बच्ची गर्भवती निकली। ऐसे में पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराने के बाद नियमानुसार बच्ची का गर्भपात कराया।
इसके छह माह बाद एक बार इसी नाबालिग बच्ची का सीडब्ल्यूसी के पास मामला आया। पहले तो बच्ची कुछ बताने को तैयार नहीं थी। मगर जब काउंसिलिंग कर बच्ची से मामले की जानकारी ली तो उसने बताया कि एक युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया है। चूंकि बच्ची नाबालिग थी ऐसे में दोबारा से पॉक्सो एक्ट के तहत युवक पर एफआईआर दर्ज की गई।
बच्ची गर्भपात को नहीं हो रही थी तैयार
हैरानी की बात तो यह है कि जब दूसरी बार गर्भवती बच्ची हुई तो इस बार अपना गर्भपात नहीं कराना चाहती थी। वह इस बच्चे को जन्म देना चाहती थी। ऐसे में सीडब्ल्यूसी की टीम ने बच्ची को समझाया बताया कि उसके लिए बच्चे को जन्म देना और पालन करना काफी कठिन होगा। आखिरकार कुछ दिन की काउंसिलिंग के बाद बच्ची को समझ आ गया और वह गर्भपात के लिए तैयार हो गई। अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल में बच्ची का गर्भपात कराया गया। तब बच्ची दो माह की गर्भवती थी। चेयरपर्सन रंजीता बताती हैं कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के अनुसार 24 माह की गर्भवती का उसकी सहमति लेकर गर्भपात कराया जा सकता है।