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Haryana: अंबाला में सात फर्जी फर्मों ने करोड़ों के बोगस बिल काटे, 21 करोड़ आईटीसी ने पास किए

Sat, 02 Sep 2023 01:14 PM IST
नवीन दलाल वैभव शर्मा, अंबाला (हरियाणा)

सार

ऑल इंडिया स्तर पर ऐसी फर्मों की सूची तैयार की गई जिनका लेन देन और कार्यशैली संदिग्ध थी। जिसमें अंबाला के आबकारी एवं कराधान विभाग को जीएसटीएन यानि वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क से कुल 50 से अधिक फर्मों की सूची मिली थी। इनमें से जांच में सात फर्मों के कार्य संदिग्ध निकले।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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टैक्स चोरी का खेल करने वालों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की नियमों का पालन करते हुए भी चोर रास्ता अख्तियार कर ले रहे हैं। इसका खुलासा हाल ही में आबकारी एवं कराधान विभाग द्वारा पकड़ी गई सात फर्जी फर्मों के माध्यम से हुआ है। इन फर्जी फर्मों ने एक ही वर्ष में करोड़ों रुपये की बोगस बिलिंग की और 21 करोड़ 21 लाख रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पासऑन कर दिया।

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आबकारी एवं कराधान विभाग ने फर्मों के पतों पर जाकर सत्यापन किया तो खाली कमरे मिले
इतना ही नहीं इन फर्मों ने हरियाणा यही नहीं बल्कि हरियाणा के बाहर पंजाब और दूसरे राज्यों के व्यापारियों के साथ बोगस बिलिंग का खेल चलाया। अगर विभाग की नजर न पड़ती तो यह करोड़ों रुपये का सरकार के राजस्व को चूना लगा चुके होते। बहरहाल विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इन फर्मों का सत्यापन कराया और इन्हें बंद करने की कार्रवाई कर दी है। फिलहाल मामले में जांच जारी है।

करोड़ों रुपये का टर्नओवर, 26 लाख रुपये के आईटीसी पर रोक
दरअसल हाल ही में ऑल इंडिया स्तर पर ऐसी फर्मों की सूची तैयार की गई जिनका लेन देन और कार्यशैली संदिग्ध थी। जिसमें अंबाला के आबकारी एवं कराधान विभाग को जीएसटीएन यानि वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क से कुल 50 से अधिक फर्मों की सूची मिली थी। इनमें से जांच में सात फर्मों के कार्य संदिग्ध निकले। इन सात फर्मों ने वित्तीय वर्ष 2022 से 2023 के बीच में जीएसटी नंबर लेकर अपना पंजीकरण कराया था।
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इनमें से दो स्क्रैप के, तीन पेंट और हार्डवेयर, एक तार और इंसुलेटिड केबल व एक जनरल मर्चेंट का कार्य करने वाली फर्म थी। जीएसटीएन से सूची मिलने के बाद अंबाला के अधिकारियों ने फर्म के पतों पर जाकर सत्यापन कराया तो तय पते पर फर्में नहीं मिली। जांच आगे बढ़ी और इनके लेनदेन के ब्योरे को ऑनलाइन देखा गया तो पता चला कि इन फर्मों का करोड़ों रुपये का टर्नओवर है और 21 करोड़ 21 लाख रुपये का आईटीसी यह पास ऑन कर चुकी हैं।

इसके साथ ही विभाग के संज्ञान में आया कि 26 लाख 50 हजार रुपये से अधिक का आईटीसी पास करने के लिए खाता खतौनी में रखा था। ऐसे में विभाग ने तत्काल इस आईटीसी को ब्लॉक कर दिया और फर्म का पंजीकरण रद कर और उन्हें ऑनलाइन नोटिस थमाया गया। मामले की आगे जांच जारी है। इसके बाद अब इनकी टैक्स पेनल्टी निकाली जाएगी व रिकवरी की जाएगी।

सत्यापन किया तो मौके पर नहीं मिले पते
जब जीएसटी नेटवर्क से इन फर्मों की संदिग्धता मिली और इनके पतों का सत्यापन कराया गया तो वह फर्में उक्त पते पर थी हीं नहीं। बल्कि वहां खाली कमरे थे या कोई और वहां व्यापार कर रहा था। दरअसल आईटीसी की चोरी करने वाली फर्मों के गिरोह ऐसा ही करते हैं। वह पहले पते दिखाकर सत्यापन करा लेते हैं, आगे जाकर जो जगह किराये पर ली है उसे खाली कर देते हैं और कागजों पर करोड़ों रुपये का व्यापार चलता रहता है, जब तक कि विभाग की पकड़ में न आए।

क्या होता है आईटीसी
अगर कोई व्यापारी पक्के बिल से माल खरीदने पर जो सरकार को कल का भुगतान करता है। उस कर का इनपुट टैक्स क्रेडिट आपको जीएसटी रिटर्न भरने से वापस मिल जाता है। इसमें कुछ शर्तें होती हैं जिन्हें पूरा करना होता है। फर्जी फर्म बनाकर आईटीसी का खेल करने वाले गिरोह विभिन्न बिलों के आधार पर खरीद बिक्री दिखाकर आईटीसी क्लेम कर लेते हैं।

अधिकारी के अनुसार
अंबाला में कुछ संदिग्ध फर्में मिली हैं। इस मामले में विभाग जांच कर रहा है। उन्हें नोटिस भी थमाया गया है। -दीपा चौधरी, डीईटीसी, आबकारी एवं कराधान विभाग, अंबाला।

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