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राज मिस्त्री की मौत से गुस्साए लोगों ने जगाधरी रोड पर दो घंटे ट्रैफिक रोका, बस के शीशे तोडे़

Thu, 01 Oct 2015 12:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/अंबाला
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गांव बधौली स्थित शिक्षण संस्थान में निर्माण कार्य में जुटे राज मिस्त्री की मौत से गुस्साए लोगों ने बुधवार को अंबाला-जगाधरी मार्ग पर गांव कालपी में ट्रैफिक जाम कर दिया। इस दौरान यातायात बुरी तरह से प्रभावित हो गया। हरियाणा रोडवेज की बस के शीशे भी तोड़ दिए गए। मौके पर पहुंचे पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने काफी मशक्कत के बाद जाम खुलवाया। पुलिस ने रोडवेज चालक की शिकायत पर करीब 80 लोगों पर मामला दर्ज किया है। लगभग दो घंटे के बाद जाम खुलने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली। मृतक के परिजनों का कहना है कि यह हत्या का मामला है। 
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यह है मामला गांव बधौली स्थित शिक्षण संस्थान में निर्माण कार्य चल रहा है। इसी निर्माण कार्य में गांव रामपुर निवासी राज मिस्त्री पवन कुमार भी काम कर रहा था। निर्माण कार्य के लिए बांधी गई पैड से मंगलवार को पवन गिर गया। उसे गंभीर हालत में एमएम मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था, जहां उसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।  
भड़के लोगों ने किया हाइवे जाम इस हादसे से भड़के मृतक के परिजनों व अन्य ने बुधवार को अंबाला-जगाधरी हाइवे जाम कर दिया। कालपी बस स्टैंड के पास लोगों ने बीच सड़क पर ट्रैक्टर ट्रॉलियां खड़ी कर दी, जिसके कारण यातायात प्रभावित हो गया। लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। एसीपी बराड़ा अनिल कुमार, मुलाना थाना प्रभारी सुधीर तनेजा, बराड़ा सुनील कुमार व साहा थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह दल बल सहित मौके पर पहुंच गए, जबकि बाद में डीसीपी ग्रामीण विजय प्रताप सिंह भी पहुंच गए। एसीपी बराड़ा अनिल कुमार ने लोगों को समझाया लेकिन लोग कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे। बाद में डीसीपी ग्रामीण, एसडीएम बराड़ा गगनदीप सिंह, तहसीलदार पुण्यदीप शर्मा, नायब तहसीलदार दपर्ण कांबोज ने मौके पर पहुंच लोगों को समझाया। प्रशासन ने साफ कहा कि मृतक परिवार के लोगों से बातचीत की जाएगी, जबकि अन्य चले जाएं, लेकिन जब लोग नहीं माने तो पुलिस को हल्का बल उपयोग करना पड़ा। इसके बाद लोग चले गए, जिसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली। 
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जाम लगा रहे लोगों को पुलिस ने समझाकर हटाया है, जबकि इसी दौरान रोडवेज की बस पर भी ईंटें मारी गईं, जिससे बस का शीशा  क्षतिग्रस्त हो गया। रोडवेज बस चालक गुलशन की शिकायत पर पुलिस ने करीब 80 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।-सुधीर तनेजा, थाना प्रभारी , मुलाना 

असंगठित क्षेत्र के हजारों मजदूरों पर खतरे की तलवार असंगठित क्षेत्र के हजारों मजदूरों पर नियमों का खतरा मंडरा रहा है। सरकार की योजना की जानकारी न होने के कारण यह मजदूर जिंदगी का खतरा मोल लेकर निर्माण कार्यों में जुटे हैं। हजारों करोड़ रुपये का फंड होने के बावजूद असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए अभी भी खतरा नहीं टल पाया है। यही कारण है कि तमाम घटनाएं होने के बावजूद इस क्षेत्र के मजदूरों पर खतरों की तलवार लटकी हुई है। 
यह है संगठित और असंगठित का फर्क सरकार ने मजदूरों को तमाम सुविधाएं देने के लिए फंड तैयार किया है। इसके लिए मजदूरों को सरकार के पास अपने आपको रजिस्टर्ड करवाना होता है। जो मजदूर अथवा राज मिस्त्री अपने को रजिस्टर्ड करवाते हैं, उनको एक कॉपी अलाट की जाती है। इसी कॉपी के आधार पर मजदूरों को हर साल साठ रुपये (प्रति माह पांच रुपये) अदा करने होते हैं, जिसकी एवज में तमाम सुविधाएं मिलती हैं। यही रजिस्टर्ड मजदूर अथवा राज मिस्त्री संगठित क्षेत्र के मजदूर कहलाते हैं। इसके अलावा जो मजदूर रजिस्टर्ड नहीं हैं, वे असंगठित क्षेत्र के मजदूर माने जाते हैं, जिनको यह तमाम सुविधाएं नहीं मिल पाती। 
हजारों की तादाद है असंगठित मजदूरों की जिला अंबाला में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की संख्या हजारों में हैं, जबकि देश भर में एक अनुमान के अनुसार दो करोड़ मजदूर अथवा राज मिस्त्री असंगठित क्षेत्र में हैं। भवन निर्माण में जुटे इन मजदूरों पर हमेशा खतरे की तलवार लटकी रहती है। यदि यह किसी ठेकेदार के तहत काम करते हैं और यदि हादसा हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। अंबाला में कई ऐसे हादसे हो चुके हैं, जिनमें मजदूर की मौत हुई या फिर वे गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। 
भवन निर्माण से जुड़े मजदूरों का रजिस्ट्रेशन किया जाता है, ताकि उनको सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके। अभी भी कईं मजदूरों का रजिस्ट्रेशन कराया जाना है, जिसके लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। -प्रवीण कुमार, जिला प्रधान भवन एवं सन्निर्माण कामगार संघ, हरियाणा
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