सूत्रों के अनुसार 14 नवंबर को आशीष का सोनू और नूरी के साथ पैसों को लेकर झगड़ा हुआ था। इसीलिए उसने सोनू को मजा चखाने की ठान ली। 15 नवंबर को योजनाबद्ध तरीके से वह अन्य आरोपियों को साथ लेकर आया। जमकर शराब पी और नशे की हालत में सोनू और नूरी पर हमला कर फरार हो गए थे।
फेफड़ा पंचर होने और अधिक खून बहने से हुई थी सोनू की मौत
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार नूरी के कूल्हे और सोनू की पीठ व पिछले हिस्से पर तीन चाकू लगे थे। पीछे की तरफ दिल की तरफ घुसे चाकू से उसका फेफड़ा पंचर हो गया। हवा पास होनी बंद हो गई। इसके अलावा खून अधिक बहना उसकी मौत की वजह बनी।
ऐसे पकड़े गए
22 व 23 नवंबर को पकड़े गए बालिग आरोपियों का तीन दिन का रिमांड लिया गया। नाबालिगों को बाल सुधारगृह भेज दिया गया। आशीष व गुरप्रीत के घर से वारदात में प्रयोग किए गए चाकू बरामद किए गए। 29 को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिए गए।
आरोपियों ने नशे में खोला था राज
जांच अधिकारी एएसआई निरंजन के अनुसार अधिकतर आरोपी कैटरिंग का काम करते हैं। वारदात के बाद नशे की हालत में इनमें से कुछ आरोपियों ने ग्रामीणों के सामने कहा था कि वे बस अड्डे पर किसी को मजा चखाकर आए हैं। सभी ने इसे सामान्य झगड़ा मानकर अनदेखा कर दिया। अगले दिन गांव में ये बात फैल गई कि बस अड्डे पर हुए झगड़े में किसी घायल ने दम तोड़ा है। ग्रामीणों ने इन्हें चुप रहने के लिए कहा गया लेकिन तब तक ये जानकारी सीआईए-वन इंचार्ज केवल सिंह तक पहुंच चुकी थी। उन्हीं के दिशा-निर्देश केस की गुत्थी सुलझाई गई।