मंढेर सेक्टर पुंछ राजौरी में पाकिस्तान की ओर से की गई फायरिंग में शहीद हुए अंबाला के सीनियर हवलदार निर्मल सिंह का शव शुक्रवार को गांव जनसूई पहुंचा। शहीद को आखिरी सलामी देने के लिए पूरे गांव सहित आसपास के गांव से भी ग्रामीण और शहरवासी उमड़ पड़े। शाम करीब सवा चार बजे तीन वर्षीय बेटे वंशदीप ने उन्हें मुखाग्नि दी। मासूम बच्चे के हाथ पिता के अंतिम संस्कार को देख यहां हर आंख नम थी और आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। दाह संस्कार के समय आर्मी की टुकड़ी ने हथियार उल्टे करके, मातमी धुन बजाकर और हवा में गोलियां दागकर शहीद को सलामी दी।
शहीद निर्मल सिंह का जन्म गांव जनसूई में हुआ। दादा भगवान सिंह की प्रेरणा से निर्मल सिंह वर्ष 2003 में दसवीं जम्मू कश्मीर राइफल में भर्ती हुए। दादा भी सेना से रिटायर्ड थे। निर्मल सिंह ने कई स्थानों और अग्रिम चौकियों पर रहकर देश की सेवा करते हुए दुश्मनों के छक्के छुड़ाए। शहीद सीनियर हवलदार निर्मल सिंह की माता हरभजन कौर ने रुंधे गले से कहा कि मुझे बेटे पर गर्व है, ऐसे बेटे सभी माताओं को मिलने चाहिए। देश की सेवा करने का जज्बा उसमें बचपन से ही था। शहीद सीनियर हवलदार निर्मल सिंह अपने पीछे माता हरभजन कौर, पत्नी गुरविंद्र कौर, 9 वर्षीय बेटी हरमनदीप कौर, 3 वर्षीय बेटा वंशदीप और छोटे भाई काले सहित तीन बहनों को छोड़ गए हैं। शजिला प्रशासन की ओर से डीसी अशोक कुमार, विधायक असीम गोयल, नगर निगम की मेयर शक्ति रानी शर्मा, एसपी हामिद अख्तर, एसडीएम सचिन गुप्ता, पूर्व विधायक जसबीर मलौर, आर्मी के कैप्टन अनुपम वशिष्ठ, अनस तालिब, डीआईपीआरओ धर्मवीर सिंह, भूतपूर्व सैनिक वेलफेयर से अतर सिंह मुल्तानी व अन्य अधिकारियों ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र व पुष्पांजलि चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी।