अंबाला सिटी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार बंसल की अदालत ने जमीन सौदे में धोखाधड़ी के मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब शिकायतकर्ता को पहले से ही जमीन के पुराने इकरारनामे की जानकारी थी, तो धोखाधड़ी का मामला नहीं बनता। इसी के साथ कोर्ट ने आरोपी महिलाओं को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए शिकायतकर्ता की अपील को खारिज कर दिया है। दरअसल, शिकायतकर्ता हरजिंदर पाल ने आरोप लगाया था कि नछत्तर कौर और अन्य आरोपियों ने 19 दिसंबर 2008 को अपनी 3 कनाल 12 मरला जमीन उसे 15 लाख रुपये में बेचने का इकरारनामा किया था।
हरजिंदर का दावा था कि आरोपियों ने उससे यह बात छिपाई कि उन्होंने यही जमीन 2006 में पहले ही जगतार सिंह और कश्मीरी लाल को बेचने का सौदा किया हुआ है। इस आधार पर धोखाधड़ी और अमानत में ख्यानत की धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया गया था। अदालत ने पाया कि 2006 में हुए जिस पुराने सौदे को छिपाने का आरोप लगाया गया था, उस इकरारनामे पर खुद शिकायतकर्ता हरजिंदर पाल और उसका गवाह करनैल सिंह बतौर गवाह मौजूद थे। पुलिस और शिकायतकर्ता अदालत में इकरारनामे की असली कॉपियां पेश करने में नाकाम रहे। हरजिंदर ने कहा कि उसने 15 लाख रुपये 2008 से पहले दिए थे, जबकि गवाहों ने कहा कि पैसे इकरारनामे के समय दिए गए। इसके अलावा, शिकायतकर्ता अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में इतनी बड़ी रकम का जिक्र करने में भी विफल रहा। अदालत ने कहा कि यह मामला आपराधिक से ज्यादा दीवानी प्रकृति का लगता है। अदालत ने शिकायतकर्ता की अतिरिक्त सबूत पेश करने की अर्जी को भी यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अभियोजन पक्ष की कमियों को भरने के लिए बाद में नए मौके नहीं दिए जा सकते।