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..पुलिस कर्मी के निजी खाते से प्राइवेट फर्म में ट्रांसफर हुए 4.70 लाख बने गले की फांस

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शहर के एचएपी (हरियाणा आर्म्ड पुलिस, प्रथम बटालियन) सेंटर में ट्रेनिंग ले रहे 300 रंगरूटों से वर्दी व बर्तन के नाम पर 18 लाख वसूली का मामला विभाग के गले की फांस बन गया है। जिन मुलाजिमों पर मिलीभगत का आरोप है, उनमें से एक मुलाजिम के एचडीएफसी के पर्सनल खाते से छावनी की भूपेंद्र सिंह एंड कंपनी के खाते में 4.70 लाख ट्रांसफर किए गए हैं। नियमानुसार किसी भी सरकारी लेनदेन के लिए विभाग से अप्रूवल के बाद ही सरकारी पैसों से भुगतान किया जाता है। किसी को पर्सनल खाते का प्रयोग करने का अधिकार नहीं है।
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बैंक रिकार्ड ने उठाया फर्जीवाड़े से पर्दा
इस फर्जीवाड़े में शामिल आरोपियों ने बेशक पूरा मामला सांठ-गांठ से दबाने का प्रयास किया है लेकिन बैंक रिकार्ड ने सभी की हवा गुल कर दी है। एजेंसियों के बढ़ते दबाव से एचएपी में हड़कंप मचा है। एक आलाधिकारी के रिश्तेदार से मिलीभगत कर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश की मनोहर सरकार द्वारा ईमानदारी व पारदर्शिता से की गई कर्मियों की भर्ती व भ्रष्टाचार मुक्त के दावों पर अंबाला शहर एचएपी सेंटर में दाग लगा है। पोस्ट ग्रेजुएट स्तर के रंगरूटों को सरेआम ठगा गया। लेकिन किसी ने संज्ञान नहीं लिया, एक गुमनाम पत्र ने घोटाले से पर्दा उठा दिया।
पहली वर्दी देना विभाग की जिम्मेदारी
सेंटर में ट्रेनिंग कर रहे 300 रंगरूटों से पहले वर्दी के नाम पर 7 लाख, फिर बर्तन के नाम पर पहली बार 5 तथा दूसरी बार 6 लाख रुपये एकत्रित किए गए। कुछ मुलाजिमों को जो वर्दी दी गई वह निम्न स्तर की थी। दूसरी बार नाममात्र को बर्तन दिए गए और तीसरी बार कुछ नहीं दिया गया। नियमानुसार पहली वर्दी विभाग स्वयं देता है। जिन रंगरूटों ने इंकार किया तो उन्हें नौकरी से निकालने, बर्खास्त करने का भय दिखाकर दबाया गया।
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कागजों तक ही सिमटी रही खरीदारी कमेटी
रंगरूटों या अन्य खरीदारी के लिए गठित एक कमेटी सामान की गुणवत्ता व सही रेट की तस्दीक करती है कि कहीं कोई गड़बड़ तो नहीं है, लेकिन चर्चा है कि यह कमेटी केवल कागजों तक ही सीमित रही। पैसे एकत्रित करने वालों ने इस कमेटी को पूरे गोलमाल की भनक तक नहीं लगने दी। न तो कोई सामान और न ही बिल दिखाया। एक डीएसपी कमेटी की इंचार्ज हैं।
फिलहाल मैं किसी मीटिंग में व्यस्त हूं। मंगलवार कार्यालय जाने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा कि मामला क्या है और क्या कार्रवाई की जा रही है।
अनिल राव, एडीजीपी, सीआईडी
मामले में डीएसपी स्तर के अधिकारी को जांच सौंपी है। मामले में सामने आए सभी मुलाजिमों के बयान लिए जा रहे हैं। यह भी जांच के बाद ही क्लियर हो पाएगा कि किसी मुलाजिम के पर्सनल खाते से प्राइवेट फर्म में पैसे ट्रांसफर किए गए या नहीं। उसके बाद ही कुछ कहना उचित होगा।
-स्मृति चौधरी, कमांडेंट, एचएपी, प्रथम बटालियन
खरीदारी के लिए कमेटी गठित है। लेकिन कुछ सामान ऐसे भी हैं जिनमें कमेटी का दखल नहीं होता। मेरे सामने कोई खरीदारी नहीं की गई। न तो मुझे बताया न ही मुझे कोई जानकारी दी गई। जांच के दौरान मैंने अपने बयान दर्ज करा दिए हैं। इस मामले में मेरा कोई लेनदेन नहीं है।
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सुरेंद्र कौर, डीएसपी, एचएपी
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