बजट दूरदृष्टि, संतुलन और समावेशी विकास की सोच के साथ किया गया तैयार
यह बजट दूरदृष्टि, संतुलन और समावेशी विकास की सोच के साथ तैयार किया गया है ताकि समाज के हर वर्ग को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में यह बजट बुलेट ट्रेन की गति से देश को आगे ले जाने वाला साबित होगा। विज ने कहा कि इस केंद्रीय बजट में किसान, श्रमिक, मध्यम वर्ग, उद्योग, युवा और महिलाओं के हितों का समुचित ध्यान रखा गया है। यह बजट न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि भविष्य की आर्थिक और सामाजिक आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
- अनिल विज, ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री
केंद्रीय बजट आम लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। सरकार एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार विकसित होगा। युवाओं, निवेशकों, व्यापारियों, घरेलू कामकाजी महिलाओं के लिए भी बजट काफी अच्छा है। टैक्स को भी पहले के स्तर पर रखा गया है जो मध्यम वर्ग को राहत देने का फैसला है।
- शैलजा संदीप सचदेवा, पूर्व मेयर, भाजपा
मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग के हाथ खाली
यह बजट आर्थिक विवेक से अधिक राजनीतिक औपचारिकताओं का दस्तावेज बनकर रह गया है। सरकार ने बड़े आंकड़ों और तकनीकी शब्दावली के सहारे एक आकर्षक तस्वीर खींचने का प्रयास किया है। मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग के हाथ इस बजट में लगभग खाली ही रहे। न कर-संरचना में वास्तविक राहत है, न आवश्यक वस्तुओं की महंगाई पर नियंत्रण का कोई भरोसेमंद उपाय।।
-निर्मल सिंह, विधायक, अंबाला सिटी
सुधार लाने वाली ठोस नीतियों का अभाव
केंद्र सरकार ने बजट में भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प तो दोहराया है, लेकिन आम नागरिक के जीवन में वास्तविक सुधार लाने वाली ठोस नीतियों का अभाव साफ दिखाई देता है। आज भी देश की लगभग 82 करोड़ जनता को मुफ्त राशन की जरूरत पड़ रही है, जो बताता है कि जमीनी स्तर पर गरीबी और बेरोजगारी अभी भी गंभीर समस्या बनी हुई है। ऐसे में विकसित भारत के बड़े दावे तब तक अधूरे हैं।
-ओंकार सिंह, प्रदेश प्रवक्ता, इनेलो
आम आदमी के हाथ अब भी खाली
वित्तीय दृष्टि से यह बजट न तो घरेलू मांग को बल देता है, न ही छोटे व्यापारियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ठोस संबल प्रदान करता है। रोजगार सृजन और सामाजिक सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय हाशिये पर चले गए हैं। यह बजट संवेदना से अधिक संरचना का प्रतीक है, जिसमें आम आदमी की थाली, किसान की फसल और युवा की नौकरी कहीं दिखाई नहीं देती।
-चित्रा सरवारा, नेत्री
बजट में हरियाणा के लिए कुछ नहीं
बजट से प्रदेश की जनता भी बेहद निराश है। खासकर नागरिकों को उम्मीद थी कि केंद्रीय बजट के जरिये मिलने वाले पैकेज से उनकी आर्थिक दिक्कतों का समाधान होगा। खासतौर पर वास्तविक समस्याओं का समाधान होगा। केंद्रीय बजट में प्रदेश की पूरी तरह से अनदेखी की गई। बजट में न तो प्रदेश के किसानों के लिए कोई ठोस प्रावधान किया गया न बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कोई स्पष्ट योजना दिखाई दी।
-रोहित जैन, प्रदेश सचिव, अनुशासन समिति, कांग्रेस
निर्मल सिंह।
निर्मल सिंह।
निर्मल सिंह।
निर्मल सिंह।