आइसोलेशन वार्ड के अंदर हर पल जहन में ठीक होकर परिजनों से मिलने की चाहत थी और अल्लाह की इबाबत पर पूरा भरोसा। अल्लाह ताला के साथ डॉक्टरों पर भी विश्वास था कि यह सब मेरे लिए ही खड़े हैं। सात दोस्तों के साथ मैं नेपाल के बीरंगज अपने घर से निकला था। 40 दिन घर से बाहर रहकर मस्जिदों में रहकर अल्लाह को संदेश देना था। दिल्ली निजामुदीन के बाद हम अंबाला आ गए थे। कभी सपने में भी सोचा था कि जिस बीमारी से पूरा विश्व जूझ रहा है, मुझे भी उसी बीमारी से ग्रस्त होकर अस्पताल में दाखिल होना पड़ेगा। नेपाल के बीरंगज से निजामुदीन और वहां से अंबाला पहुंचे कोरोना पॉजिटिव भोजराय ने कोरोना को मात देने के बाद अमर उजाला संवाददाता से विशेष बातचीत में कुछ इसी तरह से अपनी बात रखी। भोजराय 11 दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रहा और उसने कोरोना को मात दे दी। उसकी दो रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद उसे अस्पताल से शनिवार को डिस्चार्ज कर जेएमएन कालेज में क्वारंटीन कर दिया गया है।
दिल्ली निजामुदीन से लगी थी अंबाला आने की ड्यूटी
अंबाला की मस्जिद में आने की उनकी ड्यूटी दिल्ली निजामुदीन से लगी थी। तीन दिन पांचों वक्त की जमात पढ़ने के बाद वह अंबाला आ गए थे। यहां 25 दिन तक मस्जिद में रहकर अल्लाह का संदेश व उसकी इबाबत करना बताना था। पूरे 40 दिन बाद ही उन्हें अपने घर लौटना था। उनके परिवार में बेटा, बहू, नाती सहित पत्नी है। परिवार से मिलने का बेहद मन है।
खुद दिल्ली तो बाकि साथी गए थे भोपाल तो मुंबई
गांव में जमात पर जाने की चर्चा लंबे समय से चल रही थी। पहली बार जमात में शामिल होने का मन बनाया तो बाकि साथी भी तैयार हो गए। वह साथ दोस्तों के संग दिल्ली निजामुद्दीन आ गया था तो बाकि भोपाल व मुंबई चले गए। मोहम्मद भोजराय ने बताया कि गले व सिर में दर्द होने की शिकायत थी।
मोहम्मद भोज राय की रिपोर्ट नेगेटिव है। वह बिल्कुल दुरूस्त है। फिर भी उसे क्वारंटीन कर दिया गया है।
डॉ. कुलदीप, सीएमओ, अंबाला