साढ़े 3 साल जिला तक जिला शिक्षा अधिकारी रही उमा शर्मा अब प्रिंसिपल बन गई हैं। शुक्रवार को जारी हुए तबादलों की लिस्ट में उमा शर्मा का न केवल नाम आया बल्कि उन्हें डीईओ से प्रिंसिपल नियुक्त करने का आर्डर भी जारी कर दिया गया। हालांकि अभी वह अंबाला में ही रहेंगी। क्योंकि उन्हें डाइट मोहड़ा का प्रिंसिपल नियुक्त किया गया है। लिहाजा ट्रांसफर के बावजूद उनका गृह जिला नहीं छूटेगा। गौरतलब है कि उमा शर्मा की इसी साल सेवानिवृत्ति भी होनी है। जिला शिक्षा अधिकारी के साथ जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी का भी तबादला कर दिया गया है। उनकी ट्रांसफर पानीपत से हुई थी अब दोबारा उन्हें पानीपत में ही नियुक्त कर दिया गया है। बता दें कि प्रिंसिपल पद पर डीईओ को भेजना एक तरह से डिमोशन है। क्योंकि डाइट मोहड़ा प्रिंसिपल डीईओ से जूनियर ही होता है।
एफआईआर भी हो चुकी है उमा शर्मा पर दर्ज
डीईओ उमा शर्मा के खिलाफ 30 जुलाई 2019 में कोर्ट के आदेशों पर बलदेव नगर पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की थी। हालांकि इससे आगे इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। डीईओ पर केस दर्ज होने के कारण गत वर्ष वह सुर्खियों में रही थी। दरअसल वर्ष 1998 में अंबाला शहर के गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल पुलिस लाइन में तत्कालीन प्रिंसिपल प्रेम बहल और लेक्चरर उमा शर्मा कार्यरत थी। उस दौरान चार कर्मचारियों की नियुक्ति चतुर्थ श्रेणी के तौर पर की गई। इनमें नीलम रानी, जगमोहन, दीपक चंद, नसीब कौर शामिल है। इन सभी के प्रमाण पत्र फर्जी थे। किसी की डेट आफ बर्थ का सर्टिफिकेट फर्जी था तो किसी का कुछ।
किसी भी एग्जीस्टिंग स्कूल का नहीं किया निपटान
साढ़े 3 साल के कार्यकाल में डीईओ उमा शर्मा ने एक एग्जीस्टिंग स्कूल का निपटान नहीं किया। इनके निपटान के लिए इन स्कूलों का निरीक्षण किया जाना जरूरी था। सरकार से इन स्कूलों को हर साल के लिए एक्सटेंशन मिलती है। लेकिन डीईओ ने आज तक इन स्कूलों में झांककर देखना लाजमी नहीं समझा। यही कारण नियमों का ताक पर रखकर चलने वाले स्कूल भी धड़ल्ले से चले और जो नियम पूरा कर रहे हैं उन्हें स्थाई मान्यता नहीं मिल सकी।
इस तरह गिरा डीईओ उमा शर्मा के कार्यकाल में परिणाम
जिले में वर्ष 2019 में 12वीं का परिणाम करीब 73 फीसद रहा और प्रदेश में 15वां स्थान मिला। लेकिन वर्ष 2018 में 60 फीसद के साथ भी अंबाला के होनहार प्रदेश में 15वें स्थान पर ही रहे थे। यानी 13 फीसद पास प्रतिशतता बेशक बढ़ी लेकिन प्रदेश में रैंक नहीं सुधरा। इनके कार्यकाल में हर साल अंबाला के होनहारों का परिणाम बोर्ड के कुल परिणाम से नीचे रहा। वर्ष 2016 में 63.88, 2018 में 60.94 रहा। इसी तरह 10वीं के हालात यह रहे कि 40 फीसद के तिलस्म को जिले के होनहार इनके कार्यकाल में नहीं तोड़ पाए। इस बार पीछे से प्रदेश में 3 जिले का तीसरा स्थान रहा था।