अंबाला। शंभू बॉर्डर पर किसान आंदोलन में पुलिस और किसानों के बीच हुई झड़प के मामले में दर्ज दूसरे केस में कोर्ट ने आरोप तय कर दिए हैं। इस मामले में कुछ समय पहले अंबाला कोर्ट में सुनवाई हुई थी, इससे पहले ही इस केस में पुलिस ने 200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी थी। अब मामले की सुनवाई 6 नवंबर को होगी। इस मामले में पुलिस ने 15 फरवरी 2024 को नवदीप जलबेड़ा, गुरकीरत सहित 19 किसानों को नामजद व अन्य के खिलाफ केस दर्ज था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान आईपीसी में हत्या का प्रयास, सरकारी कर्मचारी या अधिकारी को जानबूझकर चोट पहुंचाना, अपराधिक बल से सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाना, छीनाझपटी की धाराओं में आरोप तय किए गए हैं। किसानों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता रोहित जैन ने बताया कि चार्जशीट में पुलिस ने 50 गवाहों को शामिल किया है। केस में अभी गवाहियां हो रही हैं, वहीं चार्जशीट में सामने आया है कि पुलिस ने आईपीसी की धाराओं के अतिरिक्त सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, राष्ट्रीय राजमार्ग को नुकसान पहुंचाने जैसे अधिनियमों को भी केस में जोड़ा है, वहीं इसमें ट्रैक्टर ट्रॉली चढ़ाने का प्रयास भी डाला गया है।
दो नामजद किसानों की हुई थी गिरफ्तारी
इस मामले में पुलिस ने किसान नेता नवदीप जलबेड़ा और गुरकीरत को मोहाली से गिरफ्तार किया था। दोनों ही नेता अभी जमानत पर हैं, वहीं भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के नेताओं को भी मामले में नामजद किया गया था।
आठ अधिकारियों की दिखाई चोट
15 फरवरी 2024 को पुलिस और किसानों के बीच जो टकराव हुआ उसमें आठ अधिकारियों के घायल होने की चार्जशीट में बात कही गई है, जिसमें दो डीएसपी, इंस्पेक्टर, एसएसआई, कांस्टेबल शामिल हैं। इन आठ अधिकारियों और कर्मचारियों के मेडिकल भी साथ लगाए हैं, जिसमें चोट लगने का कारण गुत्थम गुत्थी को दर्शाया गया है। अब अधिवक्ता इन्हीं दावों को कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं, हालांकि चोट साधारण हैं, वहीं इससे पहले 13 फरवरी को भी शंभू बॉर्डर पर किसानों और हरियाणा पुलिस के बीच संघर्ष हुआ था। उस मामले में भी आरोप तय होने हैं, जिसमें लगभग 20 किसान नेताओं व अन्य को आरोपी बनाया गया है।