(अंबाला)शहजादपुर। किसानों को भड़काने के आरोप में किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूूनी पर केस दर्ज किया गया है। शहजादपुर अनाज मंडी में शनिवार को उनके द्वारा दिए गए भाषण का वीडियो वायरल हुआ था, इसी पर पुलिस ने संज्ञान लिया। भाषण में उन्होंने करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज का हवाला देते हुए हरियाणा भर में जाम लगाने की अपील की थी। उनकी इस अपील से पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था बाधित हुई थी।
शहजादपुर थाने में तैनात एसए ईएचसी बलजीत सिंह ने बताया कि गुरनाम सिह चढूनी ने बनौदी की शुगर मिल से किसानों की पेमेंट न मिलने के कारण एक मीटिंग रखी थी। वह भी वहीं पर मौजूद थे। उसके बाद गुरनाम सिंह ने अनाजमंडी में स्टेज पर खड़े होकर कैमरे के सामने भाषण दिया। वे बोले कि करनाल में किसानों पर लाठीचार्ज हुआ है। सभी किसान राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दो। इस बारे में एक वीडियो भी वायरल हुआ। गुरनाम सिंह के कहने पर किसानों ने हरियाणा राज्य में करीब 100 जगह पर राष्ट्रीय, राज्य राजमार्ग और अन्य रास्तों पर जाम लगा दिया। व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी, रास्ते बदलने पड़े, नागरिकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। चढूनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
भारतीय किसान यूनियन भाईचारा के प्रदेशाध्यक्ष पर हुए हमले में चढूनी सहित 14 पर केस दर्ज
- शहजादपुर में रैली के दौरान हुआ विवाद, पुलिस ने की कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
शहजादपुर। रैली का विरोध कर रहे भारतीय किसान यूनियन भाईचारा के प्रदेशाध्यक्ष व उनके साथियों पर हमला करने के मामले में गुरनाम सिंह चढूनी समेत 14 लोगों को नामजद किया गया है। आरोप है कि आंदोलन के दौरान भाषण दे रहे गुरनाम सिहं चढ़ने के कहने पर डंडों, थप्पड़-मुक्कों व पत्थरों से पीटा गया। शहजादपर में हुए इस विवाद में कुल पांच लोग घायल हुए थे, जिन्होंने सरकारी अस्पताल में मेडिकल कराया।
शिव कॉलोनी के नर सिंह उर्फ नरपत राणा भारतीय किसान यूनियन, हरियाणा के प्रधान हैं। आंदोलन कर रहे किसान प्रदेशभर में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे हैं। गुरनाम सिंह चढूनी ने पतरेहड़ी के मलकीत सिंह उर्फ काका और विक्की को अंबाला का प्रधान नियुक्त कर रखा है। वह चढूनी की देखरेख में ही अंबाला में किसान रैलियां करते हैं। शनिवार को चढूनी ने अनाज मंडी में किसानों को भड़काने के लिए रैली रखी थी। चढूनी स्टेज से किसानों को सरकार के खिलाफ भाषण दे रहे थे। रैली में जिला व नजदीकी गांव के किसान एकत्रित हुए थे। चढूनी अराजकता फैला रहे थे। नरपत के अनुसार वह कंवरपाल, अपने पुत्र संदीप, ब्रह्मपाल, जगदीप व अन्य किसानों के साथ कुछ दूरी पर खड़े होकर चढूनी के भाषण का विरोध कर रहे थे। उनके हाथों में काले झंडे थे। गुस्से में आए चढूनी ने कहा कि काले झंडे दिखाने और आंदोलन का विरोध करने वालों को मजा चखाओ, मारपीट कर भगा दो। इसी बात पर करीब 100 से अधिक किसान हाथों में झंडे लेकर उनके पास आए और उन्हें डंडों, मुक्कों से पीटना शुरू कर दिया। इन हमलावरों में राजपूत मोहल्ला के रविंद्र, दीपक, अजीत, जितेंद्र, सुभाष उर्फ काका, ओमपाल, कर्ण, मनन, पंजेटो के रोहित, शीला आढ़ती, बलविंद्र, सुखविंद्र, शाहपुरा के मलकीत सिंह, ऊपरी धमोली का मनिंद्र व अन्य शामिल थे। इन लोगों ने पत्थरों से भी चोटें मारी। मारपीट में उनके गले से सोने की चेन गिर गई, जिसे ये लोग उठाकर ले गए। उनका दांत भी टूट गया। सभी ने मौके से भागकर जान बचाई। जान से मारने की धमकी दी। मीटिंग के लिए प्रशासन की अनुमति न लेकर चढूनी व अन्य ने सरकारी आदेशों की भी अवहेलना की है।