इस त्योहार का सामाजिक व धार्मिक दृष्टि दोनों से ही महत्व है। उन्होंने बताया कि इस दिन चौदह वर्ष के बाद श्री राम के अयोध्या वापस लौटने पर अयोध्यावासियों ने घी के दीये जलाए तो कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात दीयों की रोशनी से जगमगा उठी थी।
बराड़ा। धनतेरस के पर्व को दीपावली की शुरुआत माना जाता है। धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी, कुबेर और धनवंतरि की पूजा की जाती है। मान्यता के अनुसार धनतेरस को खरीदारी के लिए साल का सबसे शुभ दिन माना जाता है। इस दिन लोग जमकर बर्तन, आभूषण, सोना व चांदी खरीदते हैं। इसे लेकर सोमवार को बाजारों में रौनक दिखी।
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श्री राधामाई मठ शिव मंदिर कलावड़ से महंत भीम पूरी बताते हैं कि धनतेरस का पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाने वाला पर्व है। इस दिन मां लक्ष्मी व भगवान गणेश की चांदी की प्रतिमाओं को घर लाने से घर, कार्यालय व व्यापारिक संस्थानों में धन, सफलता व उन्नति होती है। धनतेरस के बाद हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। आध्यात्मिक रूप से यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। इस त्योहार का सामाजिक व धार्मिक दृष्टि दोनों से ही महत्व है। उन्होंने बताया कि इस दिन चौदह वर्ष के बाद श्री राम के अयोध्या वापस लौटने पर अयोध्यावासियों ने घी के दीये जलाए तो कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात दीयों की रोशनी से जगमगा उठी थी। तब से यह प्रकाश पर्व हर्षोल्लास से हर साल मनाया जाता है।