संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। लोकसभा में रविवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 पर भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संघ ने इसे पूंजी और अवसंरचना केंद्रित बताते हुए आरोप लगाया कि इसमें श्रमिकों की आजीविका और सामाजिक सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री पवन कुमार और हरियाणा प्रदेश इकाई ने स्पष्ट किया कि निजीकरण और आउटसोर्सिंग के बढ़ते चलन से नौकरी की सुरक्षा खतरे में है।
बीएमएस ने एलान किया है कि वह श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए अपने संघर्ष को और तेज करेगा। बीएमएस ने पूर्व-बजट बैठकों में उठाई गई मांगों की अनदेखी पर गहरा असंतोष जताया है। संघ के अनुसार, आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील कार्यकर्ताओं के मानदेय में कोई वृद्धि न करना दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं, ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी न होने से सेवानिवृत्त श्रमिकों में भारी रोष है। संघ ने चेतावनी दी कि ईपीएफ और ईएसआई की वेतन-सीमा न बढ़ाने से बड़ी संख्या में श्रमिक सुरक्षा दायरे से बाहर हो जाएंगे। इसके अलावा आठवें वेतन आयोग के गठन और एनपीएस सुधार पर बजट की चुप्पी ने सरकारी कर्मचारियों को निराश किया है।