अंबाला सिटी। बर्फखाने की जमीन पर 85 वर्ष से रह रहे परिवार की जमीन पर कब्जा करने के मामले में आरोपी पक्ष से (संजीव मोहन लिभरान और तेजिंदर मोहन लिभरान) ने कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मान लिया कि जो धाराएं लगी हैं वह गैर जमानती नहीं हैं। छोटा अपराध हैं ऐसे में जमानत दी जा सकती है। इसी के चलते याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली। वहीं आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि पुलिस अगर इस मामले में धाराएं जोड़ती है तो पहले नोटिस देकर सूचित करेगी। इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हितेश गर्ग की अदालत में हुई। जहां उन्होंने तर्क दिया था कि पक्षकारों ने कोर्ट के आदेश पर जमीन पर कब्जा लिया है। इस कारण से उन्होंने कोई भी कार्य असंवैधानिक तरीके से नहीं किया है। इस मामले में सदर थाने में शिकायतकर्ता मारसेलीनो नारनौहझं की शिकायत पर कैथल निवासी अशोक गोयल और अंबाला कैंट निवासी संजीव मोहन लिभरान और तेजिंदर मोहन लिभरान के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
पीड़ित ने पुलिस को यह दी थी शिकायत
पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाए गए कि अशोक गोयल, संजीव मोहन लिभारन और तेजिंदर मोहन लिभरान डरा-धमकाकर बर्फखाने की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। मारसेलीनो नारनौहझं ने बताया कि वो 85 वर्षों से अपने परिजनों के साथ बर्फखाने की जमीन पर मकान बनाकर रह रहे थे। एक दिन आरोपी पक्ष से संजीव लिभरान आए और उसने कोर्ट के आदेश दिए, इसके बाद उसने व पुलिस ने डरा-धमकाकर घर खाली करवा लिया। उन्होंने बताया कि कुछ लोग इस पर कब्जा करने आए थे। उनके बेटे ने देखा कि काले रंग की एक गाड़ी में 6/7 लोग आए हैं। जब बेटे ने उनकी वीडियो बनाना चाहा तो उन लोगो ने बेटे को कुचलने की कोशिश की और जाते-जाते वो उन्हें जान से मारने की धमकी भी दे गए। इस मामले की शिकायत एसपी व कैबिनेट मंत्री अनिल विज को भी की गई।