अंबाला छावनी में फारुका खालसा स्कूल के सामने स्थित बर्फखाने की विवादित जमीन। फाइल फोटो
अंबाला। छावनी के बर्फखाने की जमीन पर कब्जा लेने के लिए नगर परिषद सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करेगा। इसके लिए नगर परिषद ने हरियाणा सरकार के महाधिवक्ता को पत्र लिखा है और उनसे सुप्रीम कोर्ट में मामले की पैरवी करने वाले वकीलों के पैनल की जानकारी मांगी है ताकि जो तथ्यों के आधार पर सरकार का पक्ष रख सकें और इसके आधार पर जमीन पर फैसले के आधार पर कब्जा ले सकें।
दूसरी तरफ नगर परिषद ने बर्फखाने की जमीन को लेकर भी विभागीय जांच आरंभ की है ताकि यह जानकारी मिल सके जो जमीन लीज (पट्टे) पर दी गई थी, उस एक्साइज की जमीन को कैसे संबंधित व्यक्ति ने अपने नाम पर करवा लिया। इसमें कौन-कौन से विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता है, जिनकी मदद से संपत्ति पर मालिकाना हक जताने के दस्तावेज तैयार किए गए, वहीं यह भी सामने आया है कि बर्फखाने की जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा है, उसका संपत्ति कर भी नगर परिषद ने संबंधित व्यक्ति के नाम पर लंबित रखा हुआ है जोकि लगभग 1.34 करोड़ है।
जनरल लैंड रिकॉर्ड
जनरल लैंड रिकॉर्ड (जीएलआर) के अनुसार, बर्फखाना जमीन कैंटोनमेंट बोर्ड से प्राप्त हुई थी और इसका मालिकाना हक सरकार के पास है। ऐसी जमीन की खरीद-बिक्री अपराध है और इसके लिए केस दर्ज किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल अंबाला छावनी तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के 62 छावनी क्षेत्रों से जुड़ा है, जहां अंग्रेजों के समय जमीन केवल लीज पर दी जाती थी। पांच फरवरी 1977 को अंबाला छावनी सदर क्षेत्र की जमीन कैंटोनमेंट बोर्ड से अंबाला सदर नगर पालिका को हस्तांतरित की गई थी।
बर्फखाने की जमीन के मामले की पैरवी सुप्रीम कोर्ट में की जाएगी। इसके लिए हरियाणा सरकार के महाधिवक्ता को पत्र लिखा गया है ताकि मामले के लिए वकीलों का पैनल उपलब्ध करवाया जा सके, जो कोर्ट में नगर परिषद व सरकार का पक्ष तथ्यों के आधार पर रख सकें।
देवेंद्र नरवाल, कार्यकारी अधिकारी, नप सदर, अंबाला।