माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। बैंक से व्यापार के नाम पर कर्ज लेकर उसे वापस न करने वाले डिफॉल्टर्स पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) अभिनव गर्ग की अदालत ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दायर एक रिकवरी सूट (वसूली वाद) का निपटारा करते हुए प्रतिवादी विवेक शर्मा को आदेश दिया है कि वह बैंक को 6,08,199 रुपये की बकाया राशि 6 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ लौटाएं।
मामले के अनुसार, अंबाला शहर निवासी विवेक शर्मा ने वर्ष 2016 में यूनियन बैंक की सराफा बाजार शाखा से प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 8 लाख रुपये का व्यापारिक ऋण लिया था। शुरुआत में कुछ किस्तें देने के बाद प्रतिवादी ने लोन चुकाने में कोताही बरती। नोटिस और अनुरोध के बावजूद जब राशि जमा नहीं की गई, तो आरबीआई के नियमों के तहत खाते को एनपीए (गैर-निष्पादित संपत्ति) घोषित कर दिया गया। बैंक ने अंतत: अगस्त 2020 में रिकवरी के लिए अदालत की शरण ली। अदालती कार्यवाही के दौरान प्रतिवादी विवेक शर्मा उपस्थित नहीं हुए, जिसके चलते 11 अप्रैल 2022 को उन्हें एक्स-पार्टी (एकतरफा) घोषित कर दिया गया था। अदालत ने बैंक द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों और गवाहों के बयानों को अटूट मानते हुए फैसला सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि प्रतिवादी को यह राशि तीन महीने के भीतर चुकानी होगी।