संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। शहर की छोटी सरकार नगर निगम मेयर पद की कमान इस बार भी महिला के हाथों में ही होगी। शहरी स्थानीय निकाय विभाग निदेशालय में वीरवार को मेयर पद को आरक्षित करने के लिए ड्रा निकाला गया।
इस ड्रा में अंबाला शहर के नगर निगम में मेयर पद को पिछड़ा वर्ग-बी महिला के लिए आरक्षित किया गया। निगम के कार्यकाल में ऐसा पहली बार हुआ है कि जब बीसी-बी यानि पिछड़ा वर्ग की महिला के हाथों में मेयर पद की कमान होगी। आरक्षण की इस नई व्यवस्था ने शहर के राजनीतिक सूरमाओं के गणित को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। हैरानी की बात है कि भाजपा की टिकट जीतकर 10 महीने तक मेयर पद की जिम्मेदारी संभालने वाली शैलजा संदीप सचदेवा अब मैदान से बाहर हो गईं हैं।
10 महीने के लिए मेयर रही शैलजा, खत्म हुआ कार्यकाल : बीते 13 जनवरी को मेयर व पार्षदों का कार्यकाल खत्म हो चुका है। पिछली बार महिला ओपन सीट आरक्षित की गई थी। शक्तिरानी शर्मा निगम की मेयर बनी थी, लेकिन 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में शक्तिरानी शर्मा कालका सीट से विधायक चुनी गई थीं, इसके बाद इस खाली सीट पर उप चुनाव हुआ था। उप चुनाव में भाजपा से शैलजा संदीप सचदेवा मेयर बनी थी। शैलजा ने कांग्रेस की अमीषा चावला को 20 हजार से भी अधिक वोट से हराया था। सचदेवा को 40 हजार 620 वोट मिले थे और कांग्रेस की अमीषा को 20 हजार 133 वोट हासिल कर पाई थीं। निगम कार्यकाल में 2013 में मेयर पद एससी वर्ग के लिए आरक्षित था, तब रमेश मल सबसे पहले मेयर बने थे, इसके बाद वर्ष 2020 में मेयर पद महिला के लिए आरक्षित हो गया, तब शक्तिरानी शर्मा मेयर बनी थीं और बीते वर्ष हुए उप चुनाव में शैलजा संदीप सचदेवा मेयर बनी थी।