अंबाला सिटी। हास्य को जीवन में अपनाकर लोग अपना तनाव दूर कर रहे हैं। इतना ही नहीं किसी ने हास्य योग को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है तो कोई अपनी कला से बच्चों के चेहरे पर हंसी ला रहा है।
बच्चों की मुस्कान को बचाने का काम डाॅ. शिवा अग्रवाल कर रही हैं। वह मोहड़ा स्थित डाइट पर बतौर शिक्षिका कार्यरत हैं। उन्होंने बच्चों की इस परेशानी को समझा तो बच्चों को कला और कविताओं से जोड़ने का अभिनव प्रयास किया। इसके लिए वह कई स्कूलों में गईं, बच्चे तलाशे और उन्हें चित्रकारी और कविता लेखन के लिए प्रेरित किया।
अब वह उनकी प्रतिभा को मंच देना का काम तो कर रही रही हैं साथ ही उनके चेहरे पर मुस्कान भी ला रही हैं। दरअसल मोबाइल पर अत्यधिक समय बिताने से बच्चे अवसाद से ग्रसित हो रहे हैं। इससे बच्चों में अकेलापन की समस्या बढ़ रही है और बच्चों की मुस्कान दिन-प्रतिदिन गायब हो रही है।
कला का मूल भाग प्रसन्नता देना
डॉ. शिवा अग्रवाल बताती हैं कि बच्चों को कला और कलात्मकता के जरिए खुश रखा जा सकता है। वह खुद ललित कला की प्राध्यापिका हैं। कई पुस्तकें भी लिख चुकी हैं। एक दिन उन्होंने सोचा कि सरकारी स्कूलों के बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारकर उनके चेहरे पर मुस्कुराहट लाई जाए। इसके लिए उन्होंने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीआरटी) से परियोजना की अनुमति लेकर इस अभियान को स्कूलों में शुरू किया हुआ है। डाॅ. शिवा बताती हैं कि कला का मूल भाव सुख, मस्ती, प्रसन्नता, आनंद प्रदान करना है। कला से जीवन आनंदित हो उठता है।
हंसी हो रही गायब
मनोरोग चिकित्सक डॉ. राजेंद्र रॉय ने बताया कि मोबाइल देखते समय बच्चों के दिमाग के न्यूरॉन बड़ी तेजी से हरकत करते हैं। बच्चे मोबाइल की काल्पनिक दुनिया को ही अपनी असली दुनिया बना लेते हैं। इसलिए वे हंसना खेलना भी बंद कर देते हैं। इसके साथ ही वे चिड़चिड़े भी हो जाते हैं। उनकी हंसी भी गायब हो जाती है। उनके चेहरे पर हंसी लौटाना बहुत जरूरी है। आज के समय में बच्चे ही नहीं बल्कि लोगों को भी खुशी खोजनी पड़ रही है।
हास्य योग से दूर कर रहे तनाव
अंबाला शहर में समाजसेवा करने वाले कारोबारी राकेश मक्कड़ भी जीवन में हास्य का प्रमुख योगदान बताते हैं। उन्होंने बताया कि हास्य तनाव ही नहीं बल्कि कई बीमारियों को भी दूर करता है। इसी कारण से उन्होंने हाल ही में काफी बड़े स्तर पर हास्य कार्यशाला का आयोजन किया था। जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के हास्य योग करने वाले डॉ मदन कटारिया को आमंत्रित किया। उन्होंने लोगों को हास्य योग के माध्यम से गुदगुदाया और इसके फायदे भी बताए। उन्होंने का इसका असर यह है कि शहर के हर्बल पार्क में वह खुद अपने साथियों के साथ हास्य योग करते हैं। इसी प्रकार अंबाला छावनी में योग प्रशिक्षिका एकता डांग भी अपनी योगशाला में महिलाओं को हास्य योग कराने पर जोर दे रही हैं। उन्होंने बताया कि संगीत के साथ हास्य का मिल जाना एक अद्भुत परिवर्तन और ऊर्जा का संचार करता है।