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Ambala News: मिलिट्री ग्राउंड में सेना की यूनिट, बिना मैदान अब क्रिकेट अधूरा

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अंबाला। क्रिकेट जगत में अंबाला से वैभव अरोड़ा और गुरजपनीत सिंह सहित कई चमकते सितारे निकले हो लेकिन जिले में अब एक भी क्रिकेट का सरकारी मैदान नहीं है।
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आज के समय में क्रिकेट केवल स्कूल और कॉलेजों में चलने वाली निजी अकादमियों तक ही सिमट कर रह गया है। जबकि एक समय था जब क्रिकेट के प्रेमी छावनी के गांधी मैदान व एसडी कॉलेज के सामने सेना के मैदान में खेलते थे। दर्जनों टीमों हर सप्ताह खेला करती थी। अब मिलिट्री ग्राउंड यानी सेना के मैदान में एक यूनिट बन गई है तो वहीं गांधी मैदान में साइकिल ट्रैक आदि चल रहा है। हालांकि क्रिकेट मैदान बनाने की घोषणा है लेकिन अभी तक धरातल पर कोई काम शुरू नहीं हो सका है। सालों पुरानी मांग की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा।

देररात और अलसुबह विकेट गाड़ देते थे युवा

एसडी कॉलेज के सामने सेना के मैदान में क्रिकेट खेलने के लिए युवाओं का उत्साह इस कद्र देखने को मिलता था कि एक दिन देररात को ही युवा अपनी पिच पर विकेट लगा देते थे ताकि कोई ओर सुबह न खेल सके। जबकि सुबह चार बजे ही युवा हाथ में बैट व विकेट लेकर पहुंच जाते थे। सुबह सात बजे ऐसा नजारा होता था कि मैदान में एक साथ दर्जनभर मैच चला करते थे।
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दूसरे मैच की गेंद से भी घायल होते थे खिलाड़ी
सेना के मैदान में तो कई बार मैच खेलते हुए खिलाड़ी को पता ही नहीं लग पाता था कि आखिर गेंद किसी मैच की कहां से आ रही है। यहीं कारण था कि अपने मैच पर ध्यान देते हुए दूसरे की गेंद सिर तो कभी कहीं लग जाती थी। बावजूद क्रिकेट की दीवानगी हर सप्ताह मैदान में ले आती थी। कई टीमों के बीच टूर्नामेंट हुआ करते थे।

फोटो नंबर - 46



खेलने के लिए मिलना चाहिए सरकारी मैदान

मनप्रीत सिंह ने बताया कि क्रिकेट को लेकर जो दीवानगी पहले देखने को मिलती थी वो सरकारी मैदान खत्म होने के बाद नहीं देखने को मिलती है। कई बार मैदान की मांग के लिए नगर परिषद में मिल चुके हैं लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।



फोटो- 45



खेलने के लिए मैदान ही नहीं मिलता

अंकित का कहना है कि क्रिकेट का शौक तो है लेकिन अब खेलने के लिए मैदान ही नहीं मिलता। खेल विभाग या फिर सरकारी मैदान होना चाहिए। अंबाला में युवाओं में क्रिकेट को लेकर खासा उत्साह है जो धीरे-धीरे बिना मैदान कम होता जा रहा है।
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