अंबाला सिटी। सीएमओ कार्यालय के साथ बने जिला पशु चिकित्सालय में छह जिलाें का केंद्र होने के बाद भी इसकी हालात दयनीय है। नए भवन निर्माण के लिए सरकार की ओर से 41 लाख का बजट भी जारी हो गया है लेकिन अभी तक अनुबंध नहीं लगाया गया है। इसलिए काम भी शुरू नहीं हुआ है।
स्टोर रूम से लेकर अधिकारियों के कमरे भी खंडहर बन गए हैं। अधिकारी जान जोखिम लेकर ही अपने कमरों में बैठते हैं। यहां तक की अस्पताल में हाथ धोने के लिए पानी का भी इंतजाम कर्मचारी अपने स्तर पर कर रहे हैं। कई महीने से यहां पर पानी की सप्लाई बाधित पड़ी है।
इसे अभी तक ठीक नहीं करवाया गया है। वहीं स्टोर की दीवारें इतनी कमजोर हो गई हैं कि वहां पर रोशनी का प्रबंध करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। इतना ही नहीं कई कमरे तो इतने खस्ता हाल में है कि अधिकारियों ने उनका इस्तेमाल करना ही बंद कर दिया है।बारिश के दिनों में यहां पर जलभराव हो जाता है। इसलिए ओपीडी सेवाएं भी प्रभावित होती हैं।
रोजाना 50 से 60 मरीज आते
जिला पशु चिकित्सक डॉ. कमल ने बताया कि अस्पताल में रोजाना 50 से 60 पालतू पशु उपचार के लिए आते हैं। यहां पर छह जिलों पंचकूला, कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, यमुनानगर और अंबाला की सारी सप्लाई के लिए कमिशनरी है लेकिन सामान रखने के लिए ही जगह नहीं है। इतना ही नहीं पशुओं के ऑपरेशन के लिए भी प्रर्याप्त स्थान नहीं है। वहीं जांच के लिए लैब भी नहीं है।अस्पताल में सात लोगों की स्टाफ है जिसमें अधिकारी के साथ दो चिकित्सक, दो प्री स्टाफ और अटेंडेंट हैं।
जो खंडहर भवन में जोखिम के साथ काम कर रहे हैं। स्टोर रूम की हालात इतनी खराब है कि आए दिन कोई न कोई सामान खराब हो जाता है। अलमारियों में भी जंग लग चुका है। इसके साथ ही टीके रखने के फ्रिज भी टूटे- फूटे हाल में है। लोक निर्माण विभाग को भवन निर्माण के लिए कई बार लिखा जा चुका है लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।
वर्जन
पशु चिकित्सालय के लिए सभी जिलाें के एक साथ ही बजट जारी हुआ है लेकिन अभी पशु चिकित्सालय की ड्राइंग तैयार नहीं हुई है। इसलिए काम शुरू नहीं हुआ है। ड्राइंग बनने और तकनीकी काम की रणनीति बनने के बाद ही काम शुरू होगा। जिसमें अभी समय लग सकता है।
-दलबीर सिंह, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी विभाग अंबाला।
जिला पशु चिकित्सालय के स्टोर रूम की दीवारों में आई सीलन। संवाद