मुलाना। प्रमुख सैन्य क्षेत्र के रूप में पहचाना जाने वाला अंबाला अब खेल के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। अंबाला के लाल सरबजोत सिंह को शूटिंग के खेल में विशेष योगदान के लिए अर्जुन अवार्ड मिलने जा रहा है। 27 वर्ष बाद अंबाला का यह दूसरा अर्जुन अवार्ड होगा।
इससे पहले जिम्नास्टिक में वर्ष 1998 में खिलाड़ी अंजू दुआ ने अर्जुन अवार्ड जीतकर अंबाला को गोरवान्वित किया था। खास बात है कि सरबोज के अर्जुन अवार्डी बनने तक के सफर में एक लंबा संघर्ष है, जो आज तक जारी है।
सरबजोत सिंह ने यमुनानगर स्थित अपने स्कूल से भले ही शूटिंग के खेल में कदम रखा हो, मगर इस सपने की शुरुआत तो घर से ही हो गई थी। मुलाना के गांव धीन में खेतों के बीच बना उनका घर ही उनके शूटिंग के करिअॅर की पहली पाठशाला बना। यहां घर की छत पर लकड़ी के बोर्ड पर निशाना लगाते हुए सरबजोत सिंह अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उनके खेल को छावनी में एक निजी अकादमी के कोच अभिषेक राणा ने धार दी।
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गांव से शहर तक पहुंचने में आईं मुश्किलों का किया सामना
सरबजोत सिंह के लिए गांव से शूटिंग अकादमी तक पहुंचने का रास्ता इतना आसान नहीं था। गांव की सड़क नहीं थी। रोजाना सुबह जल्दी उठना फिर बाइक या अन्य साधनों से मुख्य सड़क तक जाना। इसके बाद बस का इंतजार करना और बस आने पर अंबाला छावनी स्थित अकादमी पहुंचना। यह सफर अपने आप में एक संघर्ष से कम नहीं था। तब सरबजोत के मन में एक ही सपना था कि जिस दिन उनकी मेहनत कामयाब होगी गांव धीन में अपने आप ही विकास आएगा। ठीक हुआ भी ऐसा ही, जैसे-जैसे सरबजोत के कदम बढ़े गांव में विकास भी वैसे ही बढ़ा।
ओलंपिक है अभी भी सपना
भले ही पेरिस ओलंपिक में सरबजोत सिंह ने कांस्य पदक झटका हो मगर वह बताते हैं कि उनका सपना अभी भी पूरा नहीं हुआ है। वह आगामी ओलंपिक में और अच्छा प्रदर्शन करने के लिए तपस्या कर रहे हैं।
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अंजू दुआ ने भी हार न मानकर किया था संघर्ष
अंबाला कैंट के वार हीरोज मेमोरियल स्टेडियम में बतौर जिमनास्टिक कोच अंजु दुआ को 1998 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया है। बचपन से वे बोलने और सुनने में असमर्थ थीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। प्रतिभागियों के पैराें की गतिविधियों को देखकर उन्होंने जिमनास्टिक सीखा और अपनी पहचान बनाई। सरकार ने उनको अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया। अंजु दुआ ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में पदक जीते। वह हरियाणा के प्रसिद्ध जिम्नास्ट कोचों में से एक हैं। उनके कई प्रशिक्षुओं ने जिम्नास्टिक प्रतियोगिताओं में ख्याति प्राप्त की है। कड़ी मेहनत और समर्पण के लिए जानीं जाने वाली अंजु दुआ की उपलब्धियां काफी अधिक हैं।