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Ambala News: तालाब पर कब्जे के आरोप, एनजीटी ने हरियाणा सरकार सहित 9 विभागों काे थमाया नोटिस

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सेक्टर सात के पीछे जोहड़ अब मिट्टी से भरा हुआ। याचिकाकर्ता - फोटो : दौड़ में प्रतिभाग करने के लिए खड़े एनसीसी कैडेट्स।
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माई सिटी रिपोर्टर
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अंबाला। सेक्टर 7 में तालाब की 32 एकड़ 69 मरले जमीन पर प्राइवेट लोगों द्वारा कब्जा कर मिट्टी भरने का मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तक पहुंच गया है। इस मामले में एनजीटी कोर्ट ने पहली ही सुनवाई में मुख्य सचिव के मार्फत हरियाणा सरकार समेत 9 विभागों को नोटिस जारी किया है। नोटिस के माध्यम से एनजीटी ने हलफनामा मांगा है, जिससे कि विभाग से पक्ष लिया जा सके, इसमें मुख्य सचिव के अलावा पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, तालाब प्रबंधन प्राधिकरण, उपायुक्त, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, डीटीपी व नगर निगम शामिल हैं।
कोर्ट ने आगामी सुनवाई से एक सप्ताह पहले संबंधित पक्षकारों से हलफनामा मांगा है। 15 जुलाई को याचिकाकर्ता अखिलेश द्वारा एनजीटी में याचिका दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने शिकायत दी थी कि सुबूत होने के बावजूद जोहड़ की जमीन को मिट्टी से भरा जा रहा है। इस पर विभागीय अधिकारियों पर शिकायत की गई मगर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले की एनजीटी में 21 जुलाई को न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. ए सेंथिल वेल की पीठ ने मामले में सुनवाई की, जिसमें कोर्ट ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किए। अब आगामी सुनवाई के लिए 15 अक्तूबर की तारीख दी गई है।
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याचिकाकर्ता ने तीन प्रमुख साक्ष्य साझा दिए

इस मामले में याचिकाकर्ता ने कोर्ट को तीन प्रमुख साक्ष्य दिए, जिसमें पहले में गूगल मैप की तस्वीर दिखाई गई जिसमें सेक्टर सात के पास तालाब दिखाई देता है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सेक्टर सात का पानी इसी तालाब में पूर्व में जाता था, क्योंकि यह निचला इलाका था, इसके बाद इस जमीन को प्राइवेट लोगों ने ले लिया और अब रियल एस्टेट का प्लान तैयार कराया जा रहा है। वहीं दूसरा साक्ष्य उन्होंने डीटीपी की आरटीआई से जुड़ी रिपोर्ट दी जिसमें उन्होंने अपने रिकॉर्ड में इस स्थान पर जल निस्तारण का स्थान बताया है, इसके बाद तीसरा साक्ष्य राजस्व विभाग का रिकॉर्ड दिया। वहीं उन्होंने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के दस्तावेज भी दिए जिसमें इस जमीन को निचली जमीन माना है।
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तालाब प्रबंधन प्राधिकरण को भी दी थी शिकायत

इस मामले में शिकायतकर्ता ने तालाब प्रबंधन प्राधिकरण पंचकूला को भी शिकायत दी थी। पहले तो यह शिकायत पोर्टल से गायब हो गई। जब इस मामले को शिकायतकर्ता ने उठाया तो शिकायत वापस आ गई, हालांकि प्राधिकरण ने इस पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की, जबकि यह प्राधिकरण प्रदेश में तालाबों को संरक्षित करने का काम करता है।

सेक्टर सात के पीछे जोहड़ अब मिट्टी से भरा हुआ। याचिकाकर्ता- फोटो : दौड़ में प्रतिभाग करने के लिए खड़े एनसीसी कैडेट्स।

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