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Ambala News: साइंस और मिक्सी के बाद अब टेक्सटाइल की ओर कदम

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अंबाला। पानीपत के नक्शे कदम पर अंबाला भी अब टेक्सटाइल के क्षेत्र में कदम बढ़ा रहा है। अंबाला में बीते दो वर्षों में पांच नई टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज शुरू हुई हैं। इसमें से एक यूनिट का तो कुछ समय पहले ही शुभारंभ हुआ है।
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ये यूनिट जींस और जींस के कपड़े से लेकर कृत्रिम घास बनाने का भी काम करती हैं। खास बात यह है कि हरियाणा के लघु सूक्ष्म और कुटीर विभाग (एमएसएमई) के तहत इन यूनिटों को शुरू कराया है। दरअसल, अभी तक अंबाला को साइंस, मिक्सी और किचन एप्लाइंस उद्योग के नाम से पहचाना जाता था। यहां वर्ष 2008 में पहली बार टेक्सटाइल इंडस्ट्री की शुरुआत हुई थी। मगर एमएसएमई की नई योजनाओं ने टेक्सटाइल इंडस्ट्री की शुरुआत कराने में मदद की। अब एमएसएमई और अन्य सामान्य टेक्सटाइल इंडस्ट्री मिलाकर कुल 10 उद्योग हो गए हैं। इनमें से आधे एमएसएमई के माध्यम से हाल ही में सुचारू हैं।

देशभर के सप्लाई होता है सामान

एमएसएमई के माध्यम से हाल ही में शुरू हुए उद्योगों के पास दिल्ली, कोलकाता सहित देश के अन्य राज्यों से ऑर्डर आ रहे हैं। अंबाला में स्थापित पांच इकाइयों में दो शहजादपुर में और तीन अन्य स्थानों पर हैं। इसमें श्री भगवती, श्री कृष्णा, स्वर्णा और डीएसवाई कोटस्पिन शामिल हैं। इनमें से कुछ इकाइयां जींस का कपड़ा, कुछ धागा तो कुछ कृत्रिम घास बनाने का काम करती हैं। इनके बढ़ने से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। एमएसएमई विभाग अन्य लोगों को भी योजना का लाभ उठाकर टेक्सटाइल निर्माण के क्षेत्र में आगे जाने की बात कह रहा है।
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हरियाणा वस्त्र आत्मनिर्भर नीति में मिलेगा अनुदान

एमएसएमई अपनी हरियाणा वस्त्र आत्मनिर्भर नीति के तहत कपड़ा इकाई को स्थापित करने और मौजूदा इकाई का विस्तार करने के लिए अनुदान देता है। इसमें अलग-अलग श्रेणियाें में इकाई के लिए मशीनरी खरीदने और इकाई का निर्माण करने के लिए 35-35 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है। इसके लिए आवेदक एमएसएमई की बेवसाइट पर ऑनलाइन व ऑफलाइन आवेदन कर सकता है। इसके लिए उसे इकाई की प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करानी होती है।



वर्जन

अंबाला में हमने पांच टेक्सटाइल यूनिटों को शुरू कराया है। इसके लिए विभाग सब्सिडी देता है। लोग योजना का लाभ लेकर और भी ऐसी इंडस्ट्री खोल सकते हैं। इसमें अलग-अलग पूंजी क्षमता वाली यूनिटों को विभिन्न प्रकार की योजनाओं में सब्सिडी दी जा रही है।
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-रितुल सिंगला, डिप्टी डायरेक्टर, एमएसएमई
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