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अबकी महाशिवरात्रि पर बन रहा ग्रह नक्षत्र का खास संयोग

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अंबाला। भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के विवाह के उत्सव को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाएगा। महाशिवरात्रि का पर्व इस साल मंगलवार एक मार्च को मनाया जाएगा। भगवान शिव को समर्पित यह त्योहार इस साल बेहद खास होने जा रहा है।
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गायत्री ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. रामराज कौशिक ने बताया कि महाशिवरात्रि पर इस साल दो शुभ संयोग बन रहे हैं। इसके अलावा इस दिन पंच ग्रही योग भी बन रहा है। शुभ संयोग और शुभ मुहूर्त में भगवान शिव की आराधना करने से उनके भक्तों को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होगी। इस दिन सुबह से ही मंदिरों में शिव भक्तों की भीड़ जमा हो जाती है। सभी भक्त प्रभू की पूजा-अर्चना में जुट जाते हैं। कई लोग इस दिन अपने-अपने घरों में रुद्राभिषेक भी करवाते हैं। भगवान भोलेनाथ की कई प्रकार से पूजा अर्चना की जाती है, लेकिन महाशिवरात्रि पर यदि भक्त बेलपत्री से भगवान शिव की विशेष पूजा करें तो उनके धन संबंधी समस्याएं दूर हो जाएंगी।
खास संयोग
महाशिवरात्रि पर इस साल धनिष्ठा नक्षत्र में परिघ योग रहेगा। धनिष्ठा के बाद शतभिषा नक्षत्र रहेगा। जबकि परिघ योग के बाद शिव योग लगेगा। परिध योग में शत्रुओं के खिलाफ बनाई रणनीतियों में सफलता मिलती है। शत्रुओं पर विजय हासिल करने के लिए इसे बहुत महत्वपूर्ण समझा जाता है।
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महाशिवरात्रि पर ग्रहों का योग
महाशिवरात्रि पर इस बार ग्रहों का विशेष योग बन रहा है। 12वें भाव में मकर राशि में पंचग्रही योग बनेगा। इस राशि में मंगल और शनि के साथ बुध, शुक्र और चंद्रमा रहेंगे। लग्न में कुंभ राशि में सूर्य और गुरु की युति बनी रहेगी। चौथे भाव में राहु वृषभ राशि में रहेगा जबकि केतु दसवें भाव में वृश्चिक राशि में रहेगा।
पूजन विधि
ज्योतिषाचार्य डॉ. रामराज ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को पंचामृत से स्नान कराएं। केसर के आठ लोटे जल चढ़ाएं। पूरी रात्रि दीपक जलाएं। चंदन का तिलक लगाएं। बेलपत्र, भांग, धतूरा, गन्ने का रस, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं। सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें।
प्रहर के अनुसार शिवलिंग स्नान विधि
सनातन धर्म के अनुसार शिवलिंग स्नान के लिए रात्रि के प्रथम प्रहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घृत और चौथे प्रहर में मधु, यानी शहद से स्नान कराने का विधान है। इतना ही नहीं चारों प्रहर में शिवलिंग स्नान के लिये मंत्र भी अलग हैं....
प्रथम प्रहर में- ‘ह्रीं ईशानाय नम:’
दूसरे प्रहर में- ‘ह्रीं अघोराय नम:’
तीसरे प्रहर में- ‘ह्रीं वामदेवाय नम:’
चौथे प्रहर में- ‘ह्रीं सद्योजाताय नम:
इसके साथ ही व्रती को पूजा, अर्घ्य, जप और कथा सुननी चाहिए और स्तोत्र पाठ करना चाहिए। अंत में भगवान शिव से भूलों के लिए क्षमा जरूर मांगनी चाहिए।
महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त
इस दिन शुभ मुहूर्त एक मार्च को सुबह तीन बजकर 16 मिनट से शुरू होकर दो मार्च सुबह 10 तक रहेगा। रात्रि की पूजा शाम को छह बजकर 22 मिनट से शुरू होकर रात 12 बजकर 33 मिनट तक होगी। शिवरात्रि में जो रात का समय होता है उसमें चार पहर की पूजा होती है।
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महाशिवरात्रि चार पहर की पूजा का समय
- पहले पहर की पूजा- एक मार्च शाम 6:21 मिनट से रात्रि 9:27 मिनट तक
- दूसरे पहर की पूजा- एक मार्च रात्रि 9:27 मिनट से 12: 33 मिनट तक
- तीसरे पहर की पूजा- एक मार्च रात्रि 12:33 मिनट से सुबह 3 :39 मिनट तक
- चौथे प्रहर की पूजा- दो मार्च सुबह 3:39 मिनट से 6:45 मिनट तक
व्रत पारण का शुभ समय- दो मार्च, 2022 दिन बुधवार को छह बजकर 46 मिनट तक रहेगा
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